नदी के 200 मीटर के दायरे में कानपुर जेल भी आ रही है। जेल प्रशासन ने केडीए से जेल की जमीन लेकर इसके बदले सरसौल या माती में जमीन मांगी थी। केडीए ने जेल की जमीन पर मल्टीप्लेक्स और कामर्शियल कांप्लेक्स बनाने के लिए इस प्रस्ताव पर काम भी शुरू कर दिया था। प्रदेश सरकार के आदेश के बाद केडीए ने अपने हाथ पीछे कर लिए। इसका कारण था कि करोड़ों की जमीन लेकर केडीए यहां सिर्फ पार्क ही बना सकता था।
गंगा नदी के किनारे सिविल लाइंस में बनाई जा रही दो मंजिला इमारत को जमींदोज करने पर कमिश्नर कोर्ट ने स्टे ऑर्डर जारी कर दिया है। बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन केडीए की अधिकारियों की टीम ने प्रवर्तन दस्ते के साथ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। दोपहर तक मजदूर लगाकर इमारत को तोड़ने का काम चला।
दोपहर बाद निर्माणकर्ता राम कुमार सिंह के अधिवक्ता अश्विनी द्विवेदी मौके पर स्टे ऑर्डर की कॉपी लेकर पहुंचे। वहां मौजूद केडीए के ओएसडी अलोक कुमार वर्मा ने स्टे ऑर्डर देखते ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुकवा दी। इसके बाद दस्ता लौट गया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों को दरकिनार कर गंगा नदी के 10 मीटर के दायरे में बनाई जा रही दो-मंजिला इमारत को गिराने की कार्रवाई बुधवार को शुरू की गई थी। पहले दिन आधी से अधिक इमारत तोड़ी दी गई थी। इमारत को पूरी तरह से जमींदोज करने के लिए बृहस्पतिवार को दस्ता पहुंचा था।
अधिवक्ता अश्वनी द्विवेदी ने बताया कि इमारत की गंगा नदी से दूरी को लेकर गलत रिपोर्ट दी गई। गंगा तट के 10 मीटर के दायरे में इमारत के पिलर कैसे खड़े हो सकते हैं। केडीए ने इसका नक्शा भी पास किया है। साथ ही सुनवाई का निर्धारित मौका दिए बिना ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी गई। केडीए की इन अनियमितताओं के आधार पर कमिश्नर कोर्ट ने स्टे का ऑर्डर जारी किया है।