फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आईआईटी बनेगा इलेक्ट्रानिक्स रिसर्च का हब

Wed, 01 Jul 2015 02:17 AM IST
अमर उजाला कानपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
आईआईटी इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग और रिसर्च का हब बनेगा। डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री ने आईआईटी कानपुर में नेशनल सेंटर फॉर फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रानिक्स को स्थापित करने की मंजूरी दी है।
विज्ञापन


इसका औपचारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री बुधवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम से शाम चार बजे करेंगे। इसका सजीव प्रसारण आईआईटी कानपुर में भी होगा। इस सेंटर की मदद से इलेक्ट्रानिक्स उत्पादों की मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ाई जाएगी। औद्योगिक इकाइयों को साथ लेकर रिसर्च और रिसर्च प्रोडक्ट को बाजार में लाने का फैसला किया गया है।

जो प्रोडक्ट बाजार में आएंगे, वह फोल्डेबल (मुड़ने वाले) होंगे। इसके लिए देश, विदेश के तमाम एक्सपर्ट की भी मदद ली जा रही है। डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन ने देश का पहला नेशनल सेंटर फॉर फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रानिक्स आईआईटी कानपुर में खोला है। इसके लिए 133 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। 20 करोड़ रुपये का बजट आईआईटी कानपुर जुटाएगा।
विज्ञापन


निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना और उप निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी ने बताया कि यह प्रोजेक्ट पांच साल का है। इसमें रिसर्च और रिसर्च प्रोडक्ट को बाजार में लाया जाएगा। इस दिशा में काम शुरू हो गया है। प्रो. सुधींद्र तत्ती को मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) और प्रो. मोनिका कटियार को कोआर्डिनेटर बनाकर रिसर्च कराया जा रहा है। इलेक्ट्रानिक्स रिसर्च में 55 विज्ञानी, अधिकारी और रिसर्च स्कॉलर की टीम लगी है।  नेशनल सेंटर फॉर फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रानिक्स से मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। जो एलईडी लाइट विदेश में बन रही है, वह अगर देश में बनने लगी तो एलईडी के प्रोडक्ट सस्ते हो जाएंगे। गुणवत्ता परक उपलब्धता बढ़ जाएगी। उन्होंने बताया कि तकनीक के प्रोटो टाइप डिमांस्ट्रेशन और इसे बाजार में लाने की रणनीति पहले से बनी है।

खराब खाना पहचानने के लिए जो स्मार्ट पैकेजेज बनाए जाएंगे, उसे बाजार में लाने की जिम्मेदारी मनीपाल टेक्नोलॉजी ने उठाई है। सहस्रा इलेक्ट्रानिक्स फ्लेक्सिबल लाइटिंग को बाजार में लेकर आएगी। जापान और कोरिया की कंपनियां भी इस सेंटर से जुड़ना चाह रही हैं।

आईआईटी मुंबई सहित तमाम सरकारी और गैर सरकारी शैक्षिक, रिसर्च इंस्टीट्यूट भी इलेक्ट्रानिक्स सेंटर से जुड़कर महत्वाकांक्षी मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया का हिस्सा बनना चाह रहे हैं। डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने भी समझौते की पेशकश की है।

आम आदमी तक पहुंचने की कोशिशः नेशनल सेंटर फॉर फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रानिक्स के जरिए केंद्र सरकार आम आदमी तक पहुंचना चाहती है। जो रिसर्च हो रहा है, उसमें ब्रेस्ट कैंसर की पहचान और नकली दवा की पहचान का काम शामिल है। कार्बनिक सोलर सेल के माध्यम से उन क्षेत्रों में पहुंचा जा सकता है, जहां बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। यह तकनीक सेना के काम भी आएगी।

इसकी मदद से दुरुह क्षेत्रों में भी लाइट जलाई जा सकती है। स्मार्ट पैकेजेज में खराब खाने की पहचान करने की व्यवस्था रहेगी। जल और वायु प्रदूषण के प्रबंधन के लिए डिस्पोजबल सेंसर, स्वास्थ्य की निगरानी के लिए लैब ऑन ए चिप बनाने का काम चल रहा है। एयरपोर्ट की निगरानी, पुस्तकालय और परीक्षा की कॉपियों की मानीटरिंग के लिए फ्लेक्सिबल डिस्प्ले एवं लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है।

इलेक्ट्रानिक्स इंक बनाने का काम भी चल रहा है। यह रिसर्च सफल रहा तो सस्ती इंक बाजार में उपलब्ध कराई जा सकेगी। साढ़े तीन साल में 18 बिलियन डॉलर का होगा मार्केट ः वर्ष 2014 में फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रानिक्स का मार्केट 2.0 बिलियन डॉलर रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि वर्ष 2018 तक यह मार्केट 18 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। इसके विश्व बाजार में 500 से ज्यादा कंपनियां काम कर रही हैं। 300 कंपनी उत्तर अमेरिका, 100 यूरोप और 100 कंपनी एशिया पैसेफिक की काम कर रही हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें