कानपुर। भारतीय नौ सेना को अब आईआईटी कानपुर मजबूती प्रदान करेगा और साइबर सिक्योरिटी, एआई की मदद से सुरक्षा कवच तैयार करेगा। यह निर्णय मंगलवार को आईआईटी कानपुर में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी के दौरे के समय लिया गया। उन्होंने संस्थान में स्टार्टअप इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआईआईसी) व सी3आई हब की गतिविधियों को देखा। आईआईटी में विकसित अत्याधुनिक तकनीक, टूल्स, सिस्टम और उपकरणों की जानकारी प्राप्त की, जिनका उपयोग रक्षा क्षेत्र में किया जा सकता है।
संस्थान में आए नौसेना प्रमुख ने सी3आई हब में चल रहे नवाचार और अनुसंधान का अवलोकन किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि आईआईटी कानपुर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, डेटा एनालिटिक्स और उन्नत इंजीनियरिंग समाधानों के माध्यम से डिफेंस फोर्सेज को सहयोग प्रदान कर रहा है। एडमिरल त्रिपाठी ने खास तौर पर उन तकनीकों और उपकरणों की जानकारी ली, जिनका प्रत्यक्ष उपयोग रक्षा कार्यों में किया जा सकता है।
इस दौरान कोस्टल एरिया में दी जा रही साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष चर्चा हुई। संस्थान के विशेषज्ञों ने समुद्री सीमाओं की डिजिटल सुरक्षा, बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में साइबर खतरों से निपटने के लिए विकसित तकनीकों की जानकारी नौसेना प्रमुख को दी। बताया गया कि आधुनिक साइबर निगरानी प्रणालियों और रियल-टाइम डेटा एनालिसिस के जरिये समुद्री सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकता है।
संस्थान के अधिकारियों ने कहा कि आईआईटी कानपुर और भारतीय नौसेना के बीच यह बैठक काफी लंबी और सार्थक रही, जिसमें भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं और संयुक्त परियोजनाओं पर गहन मंथन किया गया। चर्चा के दौरान सहमति बनी कि भारतीय नौसेना, आईआईटी कानपुर से तकनीकी मदद लेगी और निकट भविष्य में किसी बड़े संयुक्त प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू किया जाएगा।