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43 मिनट में आईआईटी से नौबस्ता पहुंचेगी मेट्रो ट्रेन

Wed, 16 Sep 2015 02:16 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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मेट्रो ट्रेन के हर प्लेटफार्म पर पार्किंग की व्यवस्था होगी। स्टेशन, डिपो और पार्किंग के लिए सरकारी जमीन का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जाए, ताकि परियोजना की लागत ज्यादा न बढ़े।
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राइट्स के अधिकारी डीपीआर के ड्राफ्ट में मंगलवार को मिले सुझावों का समायोजन करें। इसी महीने के अंतिम सप्ताह में लखनऊ में मुख्य सचिव के सामने इसका प्रस्तुतीकरण होगा। उनकी सहमति लेकर पांच अक्तूबर तक फाइनल डीपीआर केंद्र सरकार को भेज दी जाएगी।

ये निर्देश मंगलवार को कमिश्नर मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने राइट्स लिमिटेड के महाप्रबंधक को मेट्रो ट्रेन के ड्राफ्ट डीपीआर के प्रस्तुतीकरण के दौरान दिए।

कमिश्नर कैंप कार्यालय में कमिश्नर की अध्यक्षता में बैठक हुई। शहर में मेट्रो ट्रेन संचालन के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने वाली राइट्स लिमिटेड के महाप्रबंधक पीयूष कंसल ने ड्राफ्ट डीपीआर का प्रजेंटेशन किया।
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ढाई घंटे चली बैठक में महाप्रबंधक ने बताया कि ड्राफ्ट डीपीआर में लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन (एलएमआरसी) ने 40 सुझाव दिए थे। उनका समायोजन कर लिया गया है। कानपुर मेट्रो का नाम कानपुर मेट्रो रेल कारपोरेशन तय किय गया है। योजना तीन चरणों में पूरी होगी। शहर में मेट्रो ट्रेन का रूट 33 किलोमीटर लंबा रहेगा।

कोच की चौड़ाई 2.9 मीटर और लंबाई 21.5 मीटर रहेगी। फिलहाल चार (कार) कोच की मेट्रो रेल चलेगी। इसकी यात्री क्षमता 1034 रहेगी। बाद में कोच बढ़ाकर छह कर दिए जाएंगे। तब इसकी यात्री क्षमता बढ़कर 1572 हो जाएगी। रूट नंबर- एक आईआईटी से नौबस्ता तक मेट्रो रेल सभी स्टेशन होते हुए 42.5 मिनट में पहुंचेगी।

शहर के दो रूटों पर 32 स्टेशन बनाए जाएंगे। उन्होंने स्टेशनों की डिजायन दिखाते हुए बताया कि 19 स्टेशनों के बाहर पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। कुछ जगह बड़ी पार्किंग रहेगी, जिनमें चार पहिया वाहन भी खड़े होंगे। कुछ में दोपहिया वाहन ही खड़े हो सकेंगे।

कमिश्नर ने राइट्स के अफसरों को निर्देश दिए कि भविष्य की आवश्यकताओं के मद्देनजर सभी मेट्रो स्टेशनों में पार्किंग की व्यवस्था की जाए। वाहन सवार किसी भी प्लेटफार्म पर अपने वाहन खड़े कर मेट्रो सुविधा का उपयोग कर सकें। इससे सड़कों पर ट्रैफिक पर भी असर पड़ेगा।

कल्याणपुर में समाज कल्याण विभाग की 100 एकड़ जमीन का भी इस परियोजना के लिए उपयोग करने पर जोर दिया। तर्क दिया कि ये जमीनें शासन के माध्यम से आसानी से मिल सकती हैं। निजी जमीन खरीदने में परियोजना की लागत बढ़ेगी।

बैठक में एलएमआरसी के महाप्रबंधक कुमार केशव, केडीए उपाध्यक्ष जयश्री भोज, मुख्य नगर नियोजक आशीष शिवपुरी, उच्च स्तरीय विकास समिति के समन्वयक नीरज श्रीवास्तव समेत विभिन्न विभागों के अफसर शामिल रहे। राइट्स के महाप्रबंधक ने बताया कि देश में जितने भी शहरों के डीपीआर बने हैं, उनमें से सबसे कम समय में कानपुर का डीपीआर तैयार हुआ है।
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