कानपुर। आईआईटी से बीटेक करने वाले एक छात्र की चार साल की पढ़ाई पर करीब 24 लाख रुपये खर्च होते हैं। यह खर्च लैब, लाइब्रेरी, इंटरनेट, वाई-फाई के इस्तेमाल, हॉस्टल में रहने और मेस में खाने की सुविधा के हैं। बड़े पैमाने पर स्कालरशिप भी दी जाती है। परास्नातक कोर्स के एक रिसर्च स्कालर को सालाना 36 हजार रुपये स्कालरशिप मिलती है। अब आईआईटी प्रशासन इसी खर्च को समायोजित करना चाह रहा है। इस बीच मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आईआईटी कानपुर के बजट में करीब 75 करोड़ रुपये की कटौती कर दी है। इससे वहां आर्थिक संकट गहरा गया है।
वर्तमान स्थिति में इंटरनेशनल हॉस्टल सहित तमाम लैब, लाइब्रेरी और क्लास रूम का निर्माण कार्य लटक गया। अब शिक्षक, कर्मचारियों को वेतन देने में दिक्कत आ रही है। यही वजह है कि आईआईटी प्रशासन खर्च में कटौती कर रहा है। बिजली और पानी का बिल नियंत्रित किया जा रहा। हॉस्टल में रहने वाले स्टूडेंटों से मेंटेनेंस चार्ज बढ़ाकर वसूलने की तैयारी है।
शक्तिशाली है आईआईटी काउंसिल
आईआईटी काउंसिल का फैसला ही अंतिम माना जाता है। यदि मानव संसाधन विकास मंत्रालय फीस बढ़ाने को हरी झंडी नहीं देता है तो भी काउंसिल प्रस्ताव पारित कर सकती है। ऐसा पहले हो चुका है। कपिल सिब्बल मानव संसाधन विकास मंत्री थे, तब सिंगल एंट्रेंस टेस्ट पर मंत्रालय और काउंसिल आमने-सामने आए थे। आईआईटी कानपुर की काउंसिल ने एंट्रेंस टेस्ट से अलग होने का संकेत तक दे दिया था। इसी का नतीजा रहा कि दो तरह (जेईई मेन और जेईई एडवांस) के टेस्ट की व्यवस्था की गई।
मोटा वेतन, नहीं आएगी दिक्कत
आईआईटी से बीटेक करके निकलने वाले स्टूडेंटों को मोटा वेतन पैकेज मिलता है। अमेरिका की ओरेकल कंपनी ने इस बार कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के स्टूडेंट को सालाना 1.80 करोड़ रुपये का वेतन पैकेज दिया है। सामान्य वेतन पैकेज 8-10 लाख रुपये सालाना है। आईआईटी प्रशासन का मानना है कि बीटेक करते ही मोटा वेतन पाने वाले स्टूडेंटों और उनके परिजनों को फीस देने में दिक्कत नहीं आएगी।