आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस विभाग में दो माह से चल रहे समर ऑफ कोड कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हो गया। इस दौरान छात्रों को अलग-अलग तरह के मोबाइल ऐप बनाने के लिए टास्क दिए गए थे जिसका लाभ समाज का हर तबका ले सके। इसमें पहला स्थान सेवियर मोबाइल ऐप ने जीता।
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यह एक ऐसा ऐप है जो किसी भी घटना की सूचना 45 सेकेंड के अंदर ही घटनास्थल के नजदीकी पुलिस थाने व अस्पताल को भेज देती है। इस ऐप को छात्र अनिकेत सांघी, नमन गुप्ता, यशार्थ बाजपेयी, तन्मय यादव, सौरव कुमार ने तैयार किया है। अनिकेत ने बताया कि इस ऐप में पांच इमरजेंसी कांटैक्ट जोड़े गए हैं जो यूजर की लोकेशन तुरंत अस्पताल में भेज देती है।
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यही नहीं इस ऐप की खासियत है कि यह अचानक लगने वाले धक्के को पहले से पता लगाकर इंसान को आगाह कर देती है। समापन समारोह में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। इस दौरान प्रो. संदीप शुक्ला ने छात्रों को संबोधित करते हुए बधाई दी। प्रो. शुक्ला ने बताया कि समर ऑफ कोड के तहत चयनित होने वाले छात्रों को आईआईटी के इंक्यूबेशन सेंटर में स्टार्टअप शुरू करने का मौका प्रदान किया जाएगा और सिडबी जैसी संस्थानों से उसे फंड भी दिलाया जाएगा।
ऑनलाइन अटेंडेंस की सुविधा
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छात्र गरिमेल्ला गोहन रघु, वतनपूरी वामसी, चींदीराला संसाक, डी ए बदजीराव, कुमार गौरव सोंगारा ने पेपरलेस अटेंडेंस मोबाइल ऐप तैयार किया है। यह मोबाइल ऐप छात्र के चेहरे को रीड करके उसकी क्लास में उपस्थिति दर्ज कर सकती है। खास बात है कि इस ऐप के जरिए कक्षाओं में होने वाली प्रॉक्सी अटेंडेंस को रोका जा सकता है। इसमें छात्र को अपना अनुक्रमांक, पाठ्यक्रम संख्या तथा दो फोटो जिसमें एक खुद की और दूसरी क्लास की अपलोड करनी होगी। इस ऐप को दूसरा स्थान दिया गया है।
छात्र केशव बंसल, हिमांशु पांडेय, आयुष थरवानी, मो. साकिब हुसैन ने मिलकर ब्लिस मोबाइल ऐप बनाया है। इस ऐप के जरिए लोग अपने घरों, पार्टी में बचने वाले खाने की जानकारी दे सकते हैं। वहीं सामाजिक संस्थान जो लोगों को खाना खिलाने का काम करते हैं वो इस ऐप के जरिए वहां से गरीबों को बांटने के लिए खाना प्राप्त कर सकते हैं। इस मोबाइल ऐप को तीसरा स्थान मिला है।