फिल्म थ्री इडियट में आमिर खान के रैंचो वाला किरदार तो याद होगा ही आपको। इस फिल्म में आमिर खान ने संदेश दिया था कि छात्र जीवन में रटने की बजाय प्रैक्टिकल नॉलेज पर छात्रों को फोकस करना चाहिए। ठीक उसी तरह रियल लाइफ में कमाल कर दिखाने वाले आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र अरविंद गुप्ता शुक्रवार को राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित होंगे।
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अरविंद गुप्ता
1975 में आईआईटी के इलेक्ट्रीकल ब्रांच से बीटेक करने के बाद अरविंद ने अनोखे अंदाज में छोटे बच्चों को खिलौने से विज्ञान पढ़ाना शुरू किया। देखते ही देखते उनके इस नायाब तरीके की चर्चा दुनिया भर में होने लगी। फिलहाल वह पुणे में चिल्ड्रेन साइंस सेंटर चलाते हैं। यहां वह बच्चों को खिलौने बनाना सीखाते हैं। इसके जरिए बच्चों को साइंस व मैथ्स पढ़ाते हैं।
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अरविंद गुप्ता
अरविंद बताते हैं कि 1975 में आईआईटी से पढ़ने के बाद उन्होंने पुणे की टेलको नामक कंपनी में नौकरी शुरू की। 1978 में उन्होंने कंपनी से एक साल के लिए पढ़ाई के लिए छुट्टी ले ली। इस छुट्टी में वह मध्यप्रदेश के हौशंगाबाद गांव में साइंस टीचिंग प्रोग्राम में शामिल होने पहुंच गए बताते हैं कि यहां आने के बाद उनकी सोच काफी बदल गई।
एक बच्चे को वह विज्ञान पढ़ाने लगे। बच्चे को समझ में नहीं आ रहा था तो उन्होंने एक खिलौना लेकर उसे समझाने की कोशिश की। फिर क्या था बच्चा बड़े ही दिलचस्पी के साथ उन्हें सुनने लगा। यह बात अरविंद को काफी अच्छी लगी। उसी पल उन्होंने बच्चों के लिए अलग-अलग तरह के खिलौने बनाने का तय कर लिया। उसके बाद नौकरी छोड़ इसी काम में लग गए। कई किताबें लिखीं और अब तक देश के तीन हजार से ज्यादा स्कूलों में बच्चों को खिलौने के माध्यम से विज्ञान पढ़ा चुके हैं।