कानपुर। देश में साइबर सुरक्षा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। दिल्ली में आयोजित डाटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (डीएससीआई) के वार्षिक सूचना सुरक्षा शिखर सम्मेलन में संस्थान को डीएससीआई एक्सीलेंस अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान आईआईटी कानपुर में स्थापित सी3आई हब के सतत प्रयासों से मिला है।
सी3आई हब की देखरेख में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स की टीम लगातार साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान को नई दिशा दे रही है। यह हब न केवल उन्नत तकनीकों के विकास पर कार्य कर रहा है बल्कि देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में स्वदेशी साइबर सुरक्षा क्षमताओं को भी मजबूत कर रहा है। मुख्य अतिथि नेशनल साइबर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर नवीन कुमार सिंह ने आईआईटी कानपुर को साइबर सुरक्षा शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह अवार्ड सौंपा।
सी3आई हब में 20 से अधिक महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास किया जा चुका है जबकि 50 से अधिक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम निरंतर संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 50 से अधिक स्टार्टअप्स को वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। विकसित की गई 50 से अधिक तकनीकों का व्यावसायिक स्तर पर उपयोग भी शुरू हो चुका है।
साइबर जागरूकता और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी सी3आई हब की भूमिका उल्लेखनीय रही है। अब तक 11 हजार से अधिक लोगों को विशेष साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षित लोगों में शिक्षण संस्थानों के छात्र-शिक्षक ही नहीं बल्कि विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल हैं।
निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि यह सम्मान भारत के साइबर सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के लिए आईआईटी कानपुर के समर्पित प्रयासों को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि सी3आई हब देशभर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों, उद्योगों और सरकारी संगठनों के साथ मिलकर नवाचार को प्रोत्साहित कर रहा है। स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान कर रहा है और उच्चस्तरीय अनुसंधान एवं कौशल विकास को बढ़ावा दे रहा है।