स्पेस के हर क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर को आने की छूट दी गई
उन्होंने दावा किया कि विक्रम-1 की सफलता से देश उन गिने चुने देशों में शामिल जाएगा, जिनके पास अपनी आर्बिटल लांच क्षमता है। डॉ. गोयनका ने कहा कि पांच साल पहले प्रधानमंत्री ने स्पेस सेक्टर को प्राइवेट इंडस्ट्री के लिए खोलने का निर्णय लिया था। इसके बेहतर परिणाम सामने आए। पांच वर्षों में 400 से अधिक स्टार्टअप हो गए हैं। यह सात-आठ वर्षों में स्पेस इकोनॉमी को 44 बिलियन डॉलर से ऊपर ले जाएंगे। स्पेस स्टार्टअप में महिलाओं का खास योगदान है। कई महिला फाउंडर्स अपने स्टार्टअप को लेकर आईं हैं। इंडियन स्पेस पॉलिसी के स्पेस के हर क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर को आने की छूट दी गई है।
ई-20 के हिसाब से तैयार हो रहे वाहन
डॉ. गोयनका ने ई-20 से किसी भी तरह के नुकसान से इंकार किया है। कहा कि अब वाहन उसी हिसाब से डिजाइन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी को छोड़े छह साल का लंबा समय हो गया है, अब ऑटोमोबाइल सेक्टर में क्या बदलाव हो रहे हैं, इसकी जानकारी नहीं है। डॉ. गोयनका महिंद्रा कंपनी से लंबे समय तक जुड़े हुए थे।
मंच से छात्रों को दिए पांच मूलमंत्र
डॉ. पवन गोयनका ने कहा कि 50 साल में बहुत कुछ बदल गया है। बिल्डिंग बदली, हॉस्टल बदले, अगर कुछ नहीं बदला है तो वह यहां की ऊर्जा है। 1976 बैच में पूरे बैच में केवल एक छात्रा थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। उन्होंने मंच पांच मूल मंत्र दिए।
- सबसे पहली सीख है कभी हार न मानना। शुरुआत में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। भाषा की समस्या, पढ़ाई में संघर्ष और आत्म-संदेह। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः अपने बैच में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह सिखाता है कि शुरुआती असफलताएं हमारी क्षमता को तय नहीं करतीं।
- दूसरी सीख है दिल की सुनना। उन्होंने अमेरिका से भारत लौटने का निर्णय लिया, जो तर्क और गणना के अनुसार सही नहीं लगता था। उन्होंने पत्नी के दिल की बात मानी और वही निर्णय उनके जीवन का सबसे सही फैसला साबित हुआ।
- तीसरी सीख है बड़े जोखिम लेना। महिंद्रा में काम करते हुए उन्होंने नए प्रोजेक्ट्स जैसे स्कॉर्पियो और इलेक्ट्रिक वाहनों पर दांव लगाया। कुछ सफल हुए, कुछ नहीं, लेकिन यही जोखिम उन्हें आगे बढ़ाते रहे। बिना जोखिम लिए बड़ी सफलता संभव नहीं होती।
- चौथी सीख है लोगों पर विश्वास करना। कोई भी बड़ी उपलब्धि अकेले हासिल नहीं की जा सकती। टीमवर्क, भरोसा और साथ मिलकर काम करना ही सफलता की असली कुंजी है।
- पांचवीं सीख है सीखना कभी न छोड़ना। 67 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने भारत के स्पेस सेक्टर में नई भूमिका स्वीकार की।किया।
युवा करेंगे सपनों को साकार
डॉ. गोयनका ने विकसित भारत 2047 की बात करते हुए कहा कि आज के युवा ही इस सपने को साकार करेंगे। छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल सफलता का पीछा न करें, बल्कि ऐसा काम करें जिससे देश को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकें।
बोले संस्थान में होती थी रैगिंग
डॉ. गोयनका के मुताबिक उन्होंने हिंदी मीडियम से पढ़ाई की थी। पहले दिन हॉल तीन में 137 रूम नंबर मिला। कई बार लगा कि अपने बैग पैक कर लौट जाऊं। रैगिंग भी होती थी। मुझसे सीनियर ने पूछा मैं कल आया था इसे अंग्रेजी में बताओ...मैने बड़े गर्व से कहा आई हैव कम टुमॉरो...। यह सुनते ही पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। डॉ. गोयनका ने कहा कि यूएसए जाकर उन्होंने अंग्रेजी में सुधार