आईआईटी के इंक्यूबेटर रवि कौशिक ने आईआईटी मुंबई के वैज्ञानिकों की मदद से एयर प्यूरीफायर अर्थ को विकसित किया था। इस तकनीक को एंटी-माइक्रोबियल एयर प्यूरीफिकेशन टेक्नोलॉजी नाम दिया है।
कानपुर आईआईटी के एयर प्यूरीफायर अर्थ को काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च- द इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी ने मान्यता दे दी है। इंस्टीट्यूट का दावा है कि प्यूरीफायर कोरोना के वायरस समेत अन्य बैक्टीरिया को भी मार गिराएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे टॉप-75 स्टार्टअप में शामिल कर बधाई दी थी।
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आईआईटी के इंक्यूबेटर रवि कौशिक ने आईआईटी मुंबई के वैज्ञानिकों की मदद से इसे विकसित किया था। इस तकनीक को एंटी-माइक्रोबियल एयर प्यूरीफिकेशन टेक्नोलॉजी नाम दिया है। यह न केवल हवा को शुद्ध करता है बल्कि कीटाणुओं को भी नष्ट करता है।
आईआईटी के स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के प्रभारी प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय ने कहा कि वर्तमान में इसका प्रयोग कई बड़ी इंडस्ट्री, कंपनी और सरकारी कार्यालयों में किया जा रहा है। रवि ने बताया कि वर्तमान में आ रहे प्यूरीफायर कणों को पकड़ने पर काम करते हैं।
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अधिक उपयोग के बाद इसका फिल्टर ही कीटाणुओं का प्रजनन स्थल बन जाता है। जबकि अर्थ का फिल्टर यूवी विकिरण और हाइड्रोक्सिल रेडिकल्स पर बेस्ड कोटिंग से तैयार है, जिससे कीटाणु निष्क्रिय हो जाते हैं। यह एयर प्यूरीफायर की तुलना में आठ हजार गुना बेहतर कीटाणुशोधन करता है।