आईआईटी कानपुर में दलित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला के उत्पीड़न के मामले में बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) ने बुधवार देर रात बड़ा फैसला लिया। मामले में दोषी पाए गए तीन प्रोफेसरों को डिमोट करने का फैसला लिया गया, जबकि एक को चेतावनी दी गई है।
डिमोशन की सजा सेवा नियमों (सर्विस रूल्स) के उल्लंघन पर दी गई है। दलित उत्पीड़न के बिंदु पर नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल कास्ट (एनसीएससी) अभी भी कार्रवाई कर सकता है। डिमोशन की सजा पाने वालों में आईआईटी धनबाद के निदेशक प्रो. राजीव शेखर के अलावा प्रो. सीएस उपाध्याय और प्रो. संजय मित्तल शामिल हैं। प्रो. ईशान शर्मा को कड़ी चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है। फैसले से पहले बोर्ड की मीटिंग में जमकर हंगामा हुआ। दरअसल, बोर्ड के चेयरमैन आरसी भार्गव का कार्यकाल गुरुवार को समाप्त हो गया। इसलिए उनकी पूरी कोशिश थी कि इस मामले को बुधवार को ही निस्तारित कर दिया जाए। जिसमें वह सफल भी हुए।
समय आने पर बोलूंगा : प्रो. राजीव
मामले में आईआईटी धनबाद के निदेशक प्रो. राजीव शेखर ने कहा कि अभी तक उन्हें बीओजी के फैसले की जानकारी नहीं मिली है। वह नोटिस आने का इंतजार कर रहे हैं। कहा कि इस मामले में सही समय पर तथ्यों के साथ बात की जाएगी।
कौन हैं ये प्रोफेसर......
प्रो. राजवी शेखर
- 1982 में आईआईटी कानपुर से मैटलर्जिकल इंजीनियरिंग से बीटेक।
- 1985 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से एमएस (मैटलर्जिकल इंजीनियरिंग)
- 1988 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से पीएचडी
- आईआईटी कानपुर में मैटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर।
- वर्तमान में आईआईटी धनबाद के निदेशक हैं।
प्रो. सीएस उपाध्याय
- 1991 में आईआईटी खड़गपुर से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग से बीटेक।
- 1993 में टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी, अमेरिका से एमए
- 1997 में टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी, अमेरिका से पीएचडी
- आईआईटी कानपुर में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर
यह है मामला
प्रो. संजय मित्तल
- 1988 में आईआईटी कानपुर से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग से बीटेक
- 1990 में यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा, अमेरिका से एमएस
- 1992 में यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा, अमेरिका से पीएचडी
- आईआईटी कानपुर में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर
प्रो. ईशान शर्मा
- 1999 में आईआईटी कानपुर से बीटेक
- 2004 में कोरनेल यूनिवर्सिटी से पीएचडी
- आईआईटी कानपुर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में
यह है मामला
इस साल जनवरी में एयरोस्पेस के पूर्व छात्र डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला को विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति मिली थी। इस पर हाल में आईआईटी धनबाद के निदेशक बनाए गए प्रो. राजीव शेखर के अलावा प्रो. सीएस उपाध्याय, प्रो. ईशान शर्मा, प्रो. संजय मित्तल सहित दस से ज्यादा प्रोफेसरों ने नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए तत्कालीन निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल से नियुक्ति की निंदा की थी। इसके कुछ दिन बाद ही प्रो. सडरेला ने इन प्रोफेसरों पर जातिगत टिप्पणी करने और उत्पीड़न का आरोप लगा दिया था। निदेशक ने पहले इस मामले की जांच एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय पाठक की अध्यक्षता वाली समिति से कराई थी। बाद में इंस्टीट्यूट के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) ने रिटायर्ड जज से इसकी जांच कराई थी, जिसमें चारों को दोषी बताया गया।