कानपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से गुरुवार को स्वरूपनगर स्थित एक होटल में आयोजित सीएमई में निमोनिया पर चर्चा की गई। पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. एके सिंह ने बताया कि निमोनिया एक गंभीर बीमारी है, जो दो प्रकार की होती है।
एक जो घर या कार्यस्थल पर संक्रमण के बाद उत्पन्न होती है और दूसरी जो अस्पताल में भर्ती रोगियों में पनपती है। उन्होंने लोगों को झोलाछाप से उपचार कराने से बचने और तेज बुखार, खांसी, बलगम और सांस फूलने जैसे निमोनिया के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि एक्सरे, बलगम, खून की जांच और कुछ मामलों में सीटी स्कैन की मदद से काफी हद तक इस बीमारी को पकड़ा जा सकता है। फिजीशियन डॉ. कुणाल सहाय ने बताया कि बदलते मौसम में सांस, एलर्जी, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के रोगियों की संख्या बढ़ जाती है।
इस लिए लोगों को ठंड से बचाव के उपाय करने चाहिए। कार्यक्रम में आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा और सचिव डॉ. शालिनी मोहन ने अतिथियों का स्वागत किया। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरी, सीनियर फिजीशियन डॉ. आशुतोष त्रिवेदी, डॉ. आनंद कुमार, डॉ. निशांत सक्सेना सहित कई चिकित्सा विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। यहां डॉ. दीपक श्रीवास्तव, डॉ. एसी अग्रवाल और अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।