कानपुर में कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण के फैलाव का आकलन कर तीसरी लहर की तैयारी के लिए सीरो सर्वे नौ जून से शुरू हो रहा है। अगर इस सर्वे में सितंबर में हुए सर्वे की तरह खानापूरी की गई तो गच्चा खाना तय है। तीसरी लहर में संक्रमण की आक्रामकता का अंदाजा न लग पाने से वही हाल होगा, जो दूसरी लहर में हुआ। संसाधन कम पड़ गए, रोगियों को बेड नहीं मिले और सड़कों पर मौतें हुईं।
संक्रमण लेवल का अंदाजा न लगने से रोगियों को ढंग से इलाज नहीं मिल पाया। कोरोना संक्रमण की पहली लहर के बाद जो सर्वे हुआ था, वह खानापूरी भर रहा था। 1442 लोगों का सैंपल लेकर इतिश्री कर ली गई। इससे हुआ यह कि कोई तैयारी नहीं हो पाई। बताया गया कि 23 प्रतिशत ऐसे लोगों में एंटीबॉडीज मिलीं, जिनमें संक्रमण पता नहीं चला।
संक्रमण का फैलाव भी नहीं पता किया गया। एंटीबॉडीज की स्थिति देखकर यह भी खुलासा नहीं हुआ कि अगली लहर में वायरल लोड की स्थिति क्या हो सकती है? वेंटिलेटर, इंटेंसिव केयर की कितनी और जरूरत पड़ सकती है। सर्वे के बाद चर्चा बंद हो गई और कोरोना की दूसरी लहर ने कहर ढा दिया। अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जीके मिश्रा का कहना है कि सर्वे के संबंध में शासन से गाइडलाइन आ गई है, उसी आधार पर सर्वे किया जाएगा। स्टाफ को प्रशिक्षण भी दे दिया गया है। आईसीएमआर की गाइडलाइन रहेगी और स्वास्थ्य संगठन का सहयोग रहेगा।