कानपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें कैंसर और लिवर रोगों पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी। प्रथम वक्ता कैंसर और रोबोटिक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. दिनेश चंद्र कटियार ने कहा कि कैंसर की शुरुआत में पहचान होने से उपचार आसान हो जाता है। इसमें जनरल फिजीशियन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। लोग किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए सबसे पहले जनरल फिजीशियन से ही संपर्क करते हैं। ऐसे में ये डॉक्टर सही समय पर मरीज को विशेषज्ञ के पास रेफर करके उसकी जान बचा सकते हैं।
कार्यक्रम का आयोजन परेड स्थित आईएमए सभागार में किया गया। डॉ. कटियार ने बताया कि कैंसर की पहचान प्रारंभिक चरण में हो जाए तो इसका इलाज अधिक प्रभावशाली, किफायती और सफल होता है। कैंसर के संकेतों को सभी पहचानना चाहिए। इनमें बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना, शरीर में गांठ या सूजन का महसूस होना, लंबे समय तक ठीक न होने वाला घाव होना, लगातार खांसी या आवाज में बदलाव, आदि हैं। कैंसर की पहचान में देरी भारी पड़ती है। प्रथम सत्र के चेयरपर्सन डॉ. एमपी मिश्रा, डॉ. प्रदीप त्रिपाठी रहे।
दूसरे वक्ता लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. सुमेश कैस्था ने बताया कि वयस्क लिवर प्रत्यारोपण सफल और सुरक्षित है। लिवर हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण, शराब और चर्बी के जमाव से खराब होता है। द्वितीय सत्र के चेयरपर्सन, डॉ साईं राम, डॉ. अजीत कुमार रावत रहे। आईएमए अध्यक्ष डॉ. नंदिनी रस्तोगी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और संचालन डॉ. गणेश शंकर ने किया। इस मौके पर एसोसिएशन के सचिव डॉ. विकास मिश्रा, डॉ. एसी अग्रवाल, डॉ. कुणाल सहाय, उपाध्यक्ष, डॉ. कीर्ति वर्धन सिंह आदि मौजूद रहे।