कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) फंड में अब कंपनियों का गोलमाल नहीं चल पाएगा। सरकार ने नकेल कसते हुए जो नई व्यवस्था बनाई है। उसके तहत यदि कंपनी अपने वार्षिक बजट का सीएसआर फंड नहीं खर्च कर पाती है, तो उसे सरकार की ओर से बताए गए फंड में रकम ट्रांसफर करनी होगी। इस संबंध में शुक्रवार को मिनिस्ट्री ऑफ कारपोरेट अफेयर्स ने सीएसआर के संशोधित नियम जारी किए हैं।
शहर में करीब पांच सौ से अधिक कंपनियां इस मद में फंड खर्च करती हैं। ऐसी कोई भी कंपनी जिसने पिछले साल में पांच करोड़ का मुनाफा कमाया है या जिसकी नेटवर्थ पांच सौ करोड़ है या सालाना टर्न ओवर एक हजार करोड़ है, उसे अपने पिछले तीन सालों के औसत मुनाफे का दो फीसदी सामाजिक दायित्वों पर खर्च करना होता है।
कोई कंपनी पूरा खर्च नहीं कर पाती है तो उसे अपनी डायरेक्टर रिपोर्ट में इसका जिक्र करना होता है। नई व्यवस्था के तहत यदि कंपनी पूरा सीएसआर फंड नहीं खर्च कर पाती तो बची राशि को सरकार द्वारा बताए गए किसी फंड में ट्रांसफर करना होगा। यदि कंपनी वार्षिक बजट से ज्यादा खर्च करती है तो अगले तीन सालों तक उस रकम को समाहित कर सकती है।
भारतीय कंपनी सचिव संस्थान के कानपुर चैप्टर के पूर्व चेयरमैन सीए अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत ऐसी संस्थाएं जो पंजीकृत ट्रस्ट हों या सोसाइटी या चैरिटेबल उद्देश्य से बनी कंपनी हों यदि सीएसआर का काम कर रही हैं तो उन्हें सीएसआर एक फार्म फाइल करके पंजीकरण करवाना होगा। इस पंजीकरण नंबर से सीएसआर का काम कर रही कंपनियों की पहचान की जा सकेगी। इस नए फॉर्म को प्रैक्टिसिंग प्रोफेशनल से सत्यापित भी करवाना होगा।