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कोरोना का तीसरी लहर का इंतजार: फाइलों से निकले तो जनता के काम आए इमरजेंसी मेडिसिन विभाग

Tue, 18 May 2021 01:32 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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हैलट में संक्रमण विभाग - फोटो : amar ujala
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कानपुर में कोरोना की संभावित तीसरी लहर में जब ज्यादा से ज्यादा सुविधाओं की दरकार है, ऐसे में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का इमरजेंसी मेडिसिन विभाग फाइलों में ही बंद है। डेढ़ साल पहले शासन ने प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ ही इसे चालू करने के निर्देश भी दिए। इ
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सके बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने विभागाध्यक्ष की तो नियुक्ति कर दी पर विभाग नहीं शुरू कराया। इस समय यदि विभाग होता तो कोविड और नॉनकोविड गंभीर रोगियों का अच्छा इलाज मिलता। कई की जान भी बच सकती थी। नेशनल मेडिकल काउंसिल ने सभी मेडिकल कालेजों में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के गठन के लिए कहा था।

इस पर शासन ने विभाग बनाने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। डेढ़ साल से अधिक समय हो गया है। शासन ने जब दबाव डाला तो सीनियर फिजीशियन डॉ. प्रेम सिंह को विभागाध्यक्ष और नोडल अधिकारी बना दिया पर अभी तक विभाग का भवन तय नहीं हो सका। यह भी नहीं तय है कि नोडल के अलावा और किस कंसल्टेंट की तैनाती की जाएगी। 
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इन्हें मिलता फायदा
इस विभाग को शुरू करने के पीछे उद्देश्य था कि सारे रोगों के गंभीर मरीजों को एक ही विभाग में इलाज मिल सके। सुपर स्पेशिएलटी व्यवस्था होने से रोगी को विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। जैसे एक्सीडेंट के मामले में सर्जरी और अस्थि रोग के बीच मरीज घूमता रहता है और कई बार उसकी जान चली जाती है।
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ब्लैक फंगस के आने के बाद नई स्थिति पैदा हुई है। इसमें भी रोगी ईएनटी, नेत्र रोग, न्यूरोलॉजी और सर्जरी के बीच चक्कर लगाता रहता है। इस तरह के मामलों में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग होने से बहुत राहत मिलती। कोरोना के मामलों में भी यही हालात हैं। इस रोग में भी मरीज को किडनी, लिवर, हार्ट की समस्या होने लगती है। विभाग होता तो उन्हें भी एक ही छत के नीचे इलाज मिल जाता। 

यहां शुरू किया जा सकता है विभाग
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के पास इमरजेंसी मेडिसिन विभाग शुरू करने के लिए जगह की कमी नहीं है। मैटरनिटी विंग में एक तल इसके लिए तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा आईडीएच खाली रहता है, बहुत कम रोगी रहते हैं। मेडिसिन विभाग के पीछे वाले हिस्से, अस्थि, न्यूरो साइंसेज में भी इसके लिए जगह निकाली जा सकती है। 


अभी तो कोरोना चल रहा है। कोरोना खत्म हो जाए तो फिर इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के बारे में सोचें। फिलहाल काम तो चल रहा है। गंभीर रोगियों को हैलट इमरजेंसी और वार्डों में भर्ती करा दिया जाता है।
डॉ. आरबी कमल, प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
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