उत्तराखंड के रामनगर इलाके पर तीव्र भूकंप का खतरा मंडरा रहा है। आने वाले सालों में रामनगर इलाके में 7.5 से लेकर 8 रिक्टर स्केल की तीव्रता वाला भूकंप आएगा। इससे कानपुर भी दहल जाएगा। कानपुर के अलावा बरेली, लखनऊ, दिल्ली के इलाके प्रभावित होंगे।
गंगा तट पर बसा होने की वजह से कानपुर इसकी तीव्रता से अधिक प्रभावित होगा। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने गहन अध्ययन से तैयार की अपनी रिपोर्ट को मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस को भेजा है।
रिपोर्ट में साफ है कि अगर बिल्डिंग बनाने के सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई तो भारी तबाही हो सकती है। आईआईटी कानपुर के अर्थसाइंस विभाग के वैज्ञानिक प्रो. जावेद एन मलिक और उनकी टीम ने इतिहास और अवशेषों के आधार पर यह दावा किया है।
वह और उनकी टीम पूरे देश में भूकंप के आधार पर सर्वे कर रही है। प्रो. जावेद ने बताया कि इस इलाके में सन 1505 में भूकंप आया था। टीम ने जीपीआर और जीपीएस और सैटेलाइट की मदद से पहाड़ी और तराई के क्षेत्र में सन 1505 में आए भूकंप के निशान तलाशे हैं।
उनका दावा है कि 7.5 से लेकर 8 रिक्टर स्केल की तीव्रता वाला भूकंप निश्चित आया होगा। इसके बाद भूकंप आने के प्रमाण नहीं मिले हैं। प्रो. जावेद कहते हैं कि जहां इतनी तीव्रता का भूकंप आया हो वहां 500-550 साल में कंपन फिर शुरू हो जाता है और भूकंप आने की आशंका बढ़ जाती है।
इसका सटीक समय नहीं बताया जा सकता है, यह घटना कभी भी घट सकती है। समय निश्चित भले ही न हो लेकिन भूकंप आना निश्चित है।
उन्होंने कहा कि ग्राउंड पैंट्रिंग रडार के माध्यम से आठ मीटर अंदर तक जमीन को परखा है। मिट्टी की सतह एक के ऊपर एक चढ़ी है। टेक्टोनिक प्लेटों की सक्रियता बढ़ी है। जहां जहां भूकंप आया है वहां डाटा मैप तैयार किया जा रहा है।
सावधानियों पर दें ध्यान
प्रो. जावेद ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन समय रहते जानकारी काफी बचाव कर सकती है। उन्होंने कहा कि बिल्डिंगों का निर्माण बिल्डिंग कोड के नियमों के अनुसार ही करें।