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Kanpur News: अवनीश एक साल से जेल में तो रिमांड की क्या जरूरत.

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कानपुर। अभियुक्त एक साल से जेल में बंद है। उसके विवेचना में सहयोग न करने, भाग जाने, गवाहों को धमकाने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोई संभावना नहीं है। विवेचक जेल में अवनीश को नोटिस देकर पूछताछ कर सकते हैं। अपराध में दो साल तक की कैद की सजा का प्रावधान है। ऐसे में अवनीश को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की कोई जरूरत नहीं। इन्हीं टिप्पणियों के साथ सीजेएम सूरज मिश्रा ने अवनीश दीक्षित को गाली-गलौज व धमकी के मामले में न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की विवेचक की अर्जी खारिज कर दी।
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लालबंगला निवासी 74 वर्षीय नयनतारा जायसवाल ने चकेरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उनके भाई राकेश ने ईको फ्रेंड्स सोसाइटी बनाकर करोड़ों रुपये की संपत्ति संस्था के नाम अर्जित की थी। जुलाई 2019 में उनकी मौत के बाद सचिव पीयूष जायसवाल व उनकी बेटी ज्योति ने फर्जीवाड़ा कर लाखों रुपये निकाल लिए। सूचना देने पर बैंक खाता सीज कर दिया गया। तभी अवनीश दीक्षित, शैलेंद्र कुमार पांडे, संजीव मिश्रा, अंशुल पांडे, सुमित झा व शहर के अन्य नामचीन लोगों ने मिलकर झूठे मुकदमे लिखा दिए। उनसे गाली-गलौज कर डराया धमकाया। चकेरी थाने में दर्ज इस मुकदमे के विवेचक गाली-गलौज व धमकी के आरोप में अवनीश को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की अर्जी लेकर कोर्ट पहुंचे थे। अवनीश के अधिवक्ता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि एफआईआर में अवनीश ने कब वादिनी को गाली देकर डराया धमकाया, इसका जिक्र नहीं है। अगर घटना अवनीश को जेल भेजे जाने से पहले की है तो रिपोर्ट इतने दिनों बाद क्यों लिखाई गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने रिमांड अर्जी खारिज कर दी, साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दी है कि सात साल से कम सजा वाले अपराधों में विशेष परिस्थितियों में ही अभियुक्त की गिरफ्तारी की जाएगी। फिर भी विवेचक पालन नहीं करते। कोर्ट ने पुलिस कमिश्रर को आदेश की एक प्रति भेजकर सभी थाने के विवेचकों को सख्त निर्देश देने को कहा है।
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