भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले चैंपियंस ट्रॉफी के महा मुकाबले की दुनिया भर में चर्चा हो रही है। फैंस अपनी पसंदीदा टीम की जीत के लिए पूजा -अर्चना कर रहे हैं तो कहीं दुआएं मांगी जा रही है। कल से अभी तक लगातार टीवी चैनलों से लेकर अलग-अलग अखबारों में दिखाया जा रहा है कि लोग हवन कर रहे हैं। तो वहीं अपनी पसंदीदा टीम की जीत के लिए रमजान के पाक महीने में रोजा रखकर जीत की दुआएं मांग रहे हैं। इन दुआओं में सबसे खास महबूब हसन की दुआ मानी जा रही है।
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान सरफराज अहमद
महबूब हसन कोई और नहीं बल्कि पाकिस्तानी टीम के कप्तान सरफराज अहमद के मामा है। अब हम एक ऐसी बात बताने जा रहे हैं, जिसे जानकार आप थोड़ा अचरज में पड़ सकते हैं। सरफराज अहमद का ननिहाल भारत में हैं।
महबूब हसन भांजे सरफराज के साथ
पाकिस्तान टीम के कप्तान के मामा महबूब हसन उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के कुंडा में रहते हैं। इससे भी दिलचस्प बात यह है कि सरफाराज अहमद कई बार अपने ननिहाल आ चुके हैं। यानी उनका भारत से गहरा नाता है।
मेहबूब हसन
चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले से पहले सरफराज अहमद का पूरा परिवार जहां पाकिस्तान के जीत की दुआ मांग रहे हैं, वहीं उनके मामा महबूब हसन अपने मुल्क भारत की टीम की जीत के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। यहीं नहीं उन्होंने कहा है कि वे विराट कोहली का समर्थन करेंगे।
महबूब हसन भांजे सरफराज अहमद के साथ
महबूब हसन ने बताया कि उन्हें अपने भांजे सरफराज से काफी लगाव है, लेकिन देश पहले आता है। इसलिए वह टीम इंडिया को जीतते देखना चाहते हैं।हालांकि उनका ये भी कहना है कि भले ही पाकिस्तान टीम हार जाए, लेकिन भांजा सरफाराज अहमद शानदार प्रदर्शन करे। उन्होंने चैंपियंस ट्रॉफी के सारे मैच देखे हैं। पूरे टूर्नामेंट में भांजे के शानदार खेल और कप्तानी से वे काफी खुश हैं।
महबूब हसन का कहना है कि सरफराज के दादा हाजी वकील अहमद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के रहने वाले थे। यहां तक की सरफरारज के दादा आजादी के बाद पहले ग्राम पंचायत चुनाव में जीतकर प्रधान बने थे। हालांकि साल 1952-53 में वह पाकिस्तान के कराची में जाकर बस गए थे।70 के दशक में उनके बेटे शकील अहमद के साथ महबूब हसन की बहन शकीला का विवाह हुआ था।