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IAS रिंकू ने पोस्ट लिख मांगा ट्रांसफर: 'संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप काम करना मुश्किल', विवादों से जुड़ा नाम

Thu, 20 Aug 2026 11:14 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, जालौन

सार

जालौन जिले में पांच मई को तैनाती के बाद एसडीएम रिंकू सिंह राही लगातार विवादों को लेकर सुर्खियों में रहे। करीब तीन महीने के कार्यकाल में उनका नाम जनप्रतिनिधि, लेखपाल, तहसील कर्मचारियों, नगर पालिका अधिकारियों और अधिवक्ताओं से जुड़े विवादों में सामने आया। जालौन एसडीएम पद से हटाकर उन्हें उरई में एसडीएम न्यायिक की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन यहां भी उनकी कार्यशैली को लेकर चर्चाएं जारी रहीं।
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IAS Rinku Singh Rahi - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट लिखकर प्रदेश की मौजूदा नौकरशाही व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी और वर्तमान सेवा के अनुभवों के आधार पर उन्हें यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है कि वह उत्तर प्रदेश की वर्तमान नौकरशाही संस्कृति के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
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 उन्होंने दूसरे राज्य या कैडर में जाकर सकारात्मक काम करने का अवसर मिलने की इच्छा भी जताई है। कैडर बदलने की उनकी मांग की जानकारी पहले भी सामने आ चुकी है। राही ने अपनी पोस्ट में लिखा कि आईएएस बनने का उनका उद्देश्य उन कार्यों को करना था, जिनकी अपेक्षा जनता से किए गए वायदों को पूरा करने के लिए देश और प्रदेश का नेतृत्व प्रशासन से करता रहा है। 

उनका आरोप है कि उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप निचले स्तर तक काम करना मुश्किल बना हुआ है। उन्होंने लिखा कि भ्रष्ट नौकरशाही कभी नहीं चाहेगी कि उनके जैसे लोगों को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिले। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि ईमानदार लेकिन व्यवस्था में रच-बस चुके अधिकारियों के सामने भी यह अहं का सवाल हो सकता है कि यदि वे कोई काम नहीं कर पाए तो कोई दूसरा कैसे कर सकता है।
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‘माफिया से लड़ना प्रशासन का सामान्य दायित्व’
राही ने पोस्ट में लिखा कि माफिया और भ्रष्टाचार से लड़ना प्रशासन का सामान्य आधारभूत दायित्व है, लेकिन ऊपर से संरक्षण मिलने पर यह संघर्ष सकारात्मक परिणाम देने के बजाय निरर्थक संघर्ष में बदल जाता है। उनके मुताबिक ऐसी स्थिति में अधिकारी की ऊर्जा व्यवस्था सुधारने के बजाय व्यवस्था को नकारात्मक दिशा में जाने से रोकने में खर्च होने लगती है।

 

उन्होंने कहा कि सूचना और एआई के तकनीकी दौर में बेसिक गवर्नेंस सुनिश्चित करना केवल इच्छाशक्ति और संस्थागत प्रतिबद्धता का प्रश्न रह गया है। उनका कहना है कि यदि उत्तर प्रदेश में उन्हें ऐसी तहसील तक नहीं मिल पा रही, जहां संवैधानिक व्यवस्था लागू करने पर कथित रूप से माफिया और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण न मिले, तो भविष्य में किसी जनपद, मंडल या आमजन पर प्रभाव डाल सकने वाले विभाग में सार्थक काम कर पाना भी मुश्किल होगा।

दूसरे राज्य में खुद को परखना चाहता हूं
आईएएस अधिकारी ने लिखा कि देश और मानव हित के साथ आत्मपरीक्षण के दृष्टिकोण से उनके लिए शायद बेहतर होगा कि उन्हें किसी दूसरे राज्य या कैडर में सकारात्मक कार्य करने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि इससे वह खुद को भी परख सकेंगे कि अनुकूल संस्थागत वातावरण में वास्तव में कितना सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

 

अंत में उन्होंने लिखा कि अब देखना है कि कौन सा राज्य या कैडर उन्हें यह अवसर देता है और कौन सा कैडर संवैधानिक व्यवस्था के उद्देश्य से बिना अनावश्यक भटकाव के देश और मानव सेवा करने के लिए उनके कैडर ट्रांसफर के अनुरोध को स्वीकार करता है।

 

रिंकू सिंह राही इससे पहले भी प्रशासनिक कामकाज और अपनी पोस्टिंग को लेकर चर्चाओं में रहे हैं। जुलाई में उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से कैडर ट्रांसफर अथवा अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के अनुरूप वेतन में कटौती की मांग की थी।

तैनाती के बाद विवादों से जुड़ा है रिंकू सिंह राही का नाम
जालौन जिले में पांच मई को तैनाती के बाद एसडीएम रिंकू सिंह राही लगातार विवादों को लेकर सुर्खियों में रहे। करीब तीन महीने के कार्यकाल में उनका नाम जनप्रतिनिधि, लेखपाल, तहसील कर्मचारियों, नगर पालिका अधिकारियों और अधिवक्ताओं से जुड़े विवादों में सामने आया। जालौन एसडीएम पद से हटाकर उन्हें उरई में एसडीएम न्यायिक की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन यहां भी उनकी कार्यशैली को लेकर चर्चाएं जारी रहीं।

 

पांच मई को जालौन में तैनाती, तीन महीने में जनप्रतिनिधि, कर्मचारी, अधिकारी और अधिवक्ताओं से टकराव के मामले आए सामने
जालौन तहसील में तैनाती के दौरान बेतवा आइस एंड कोल्ड स्टोरेज के निरीक्षण के समय भाजपा ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन से उनका विवाद हो गया। ब्लॉक प्रमुख ने अभद्रता, थप्पड़ मारने की कोशिश और धक्का-मुक्की के आरोप लगाए। घटना का वीडियो भी सामने आया था। मामले की डीएम स्तर से जांच कराई गई। इसके बाद 30 जून को राही को जालौन एसडीएम पद से हटाकर उरई में एसडीएम न्यायिक की जिम्मेदारी दी गई।

इस दौरान लेखपालों में भी उनकी कार्यशैली को लेकर नाराजगी सामने आई। जून के अंत में लेखपालों ने सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया। शिक्षकों, व्यापारियों और तहसील कर्मचारियों की ओर से भी उनकी कार्यशैली को लेकर शिकायतों की चर्चा रही। राही ने खुद डीएम को पत्र लिखकर प्रशासनिक व्यवस्था, जवाबदेही और सूचनाओं के आदान-प्रदान को लेकर सवाल उठाए।

 

एसडीएम न्यायिक बनाए जाने के बाद शासन को भेजा गया उनका पांच पन्नों का पत्र भी चर्चा में रहा। इसमें उन्होंने कहा था कि मौजूदा पद पर उन्हें करीब चार घंटे का ही काम मिल रहा है। उन्होंने पर्याप्त जिम्मेदारी नहीं मिलने तक आधा वेतन दिए जाने पर भी आपत्ति नहीं होने की बात कही थी। साथ ही उपयुक्त फील्ड पोस्टिंग या कैडर बदलने की मांग रखी थी।

उरई के नए तहसील भवन में एसडीएम न्यायिक के लिए अलग कोर्ट और चैंबर की व्यवस्था को लेकर भी राही का नाम चर्चा में आया। इसके अलावा उरई नगर पालिका में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के दौरान ईओ राम अचल कुरिल से उनकी तीखी नोकझोंक हुई। राही ने ईओ पर ‘सेटिंग’ करने आने का आरोप लगाया, जबकि ईओ ने जांच में मांगे गए अभिलेख सक्षम अधिकारी को उपलब्ध कराने की बात कही। बाद में नगर पालिका जांच समिति में उनकी जगह वर्तमान एसडीएम को नामित कर दिया गया।
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अगस्त में जिला बार एसोसिएशन ने भी उनकी न्यायिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अधिवक्ताओं ने राजस्व अदालतों के बहिष्कार की चेतावनी देते हुए पूर्व की शिकायतों का भी हवाला दिया। इस तरह पांच मई को जालौन में तैनाती के बाद से रिंकू सिंह राही का नाम लगातार विवादों और प्रशासनिक टकराव के मामलों में सामने आता रहा और वह अपने करीब तीन महीने के कार्यकाल में बार-बार सुर्खियों में बने रहे।
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