कानपुर। बिजली बिल घोटाले की दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (हाइडिल) को सात साल बाद जांच कराने की याद आई। शासन की सख्ती के बाद 32.62 लाख रुपये के इस घोटाले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है जिसे सात दिन में अपनी रिपोर्ट देनी है।
साल 2018 में ऑडिट कमेटी ने कानपुर देहात के झींझक कार्यालय में खाता मिलान किया था। तब पता चला था कि उपभोक्ताओं से वसूले गए 32.62 लाख रुपये सरकारी कोष में जमा ही नहीं किए गए। सात साल तक विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस दौरान कई शिकायतें विभाग तक पहुंचीं लेकिन हर बार जांच कमेटी बनाकर मामला दबा दिया जाता रहा। न घोटाला करने वाले सामने आए और ना ही सरकारी धन की रिकवरी हो सकी। अब शासन के निर्देश पर अधिशासी अभियंता प्रमोद कुशवाहा, सहायक लेखाधिकारी प्रदीप गौतम, लेखाकार विकास गुप्ता के नेतृत्व में जांच कमेटी बनाई गई है। हाइडिल के चीफ इंजीनियर आरएन सरोज ने बताया कि तीन सदस्यीय कमेटी सात दिन में अपनी रिपोर्ट देगी, उसी के आधार पर विशेष ऑडिट कराने पर फैसला होगा।