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Kanpur Crime: दुष्कर्म में पति-पत्नी को 10-10 साल कैद, 36 साल पुराने मुकदमे में कोर्ट ने सुनाई सजा

Fri, 23 Dec 2022 12:21 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

किशोरी से दुष्कर्म के 36 साल पुराने मुकदमे में कोर्ट ने सजा सुनाई है। आरोपी पति-पत्नी को 10-10 साल कैद की सजा दी है। साथ ही, 20-20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। बता दें कि मामले में दो आरोपी बरी कर दिए गए। वहीं, दो की मौत हो चुकी है।
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सजा सुनाने वाले एडीजीसी विवेक शुक्ला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में मकान मालिक की भतीजी से दुष्कर्म करने वाले किरायेदार और उसकी मदद करने वाली पत्नी को अपर जिला जज 22 योगेश कुमार ने 10-10 साल कैद की सजा सुनाई है। 20-20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। इसमें से 35 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे।

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36 साल पुराने इस मुकदमे में दो आरोपियों की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है, जबकि दोनों की पत्नियों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है। चकेरी के हरजेंदर नगर में 15 वर्षीय किशोरी बुआ के घर में रहती थी। वर्ष 1986 में किशोरी के पिता ने चकेरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें उसी मकान में किराये पर रहने वाले रामभरोसे शुक्ल उर्फ गुड्डू, उसकी पत्नी हीरा देवी, रामभरोसे के भाई राधेश्याम व उसकी पत्नी कुसुमा देवी, भाई रमाकांत व पत्नी मालती शामिल थे। बताया था कि रामभरोसे किशोरी को कमरे में ले गया। उसकी पत्नी ने बाहर से कुंडी लगा दी।

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रामभरोसे ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। इसी तरह कई बार पत्नी की मर्जी से दुष्कर्म किया। किशोरी को गर्भ ठहरने पर रामभरोसे, उसकी पत्नी, भाइयों व भाभियों ने किशोरी को डराया-धमकाया। एडीजीसी विवेक शुक्ला ने बताया कि तीनों भाइयों और उनकी पत्नियों के खिलाफ वर्ष 1986 में ही चार्जशीट कोर्ट भेज दी गई थी।

 वर्ष 1987 में हाईकोर्ट के आदेश पर मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लग गई। वर्ष 2018 में दोबारा हाईकोर्ट के आदेश पर मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई लेकिन तब तक राधेश्याम और रमाकांत की मौत हो चुकी थी। कोर्ट ने राधेश्याम और उसकी पत्नी हीरा को मदद का आरोपी मानकर सजा सुनाई, जबकि कुसुमा और मालती को बरी कर दिया।

केस डायरी गायब, विवेचक मिले नहीं, पीड़िता के बयान पर हुई सजा
एडीजीसी विवेक शुक्ला ने बताया कि लगभग 30 साल तक मुकदमे में स्टे रहने के बाद जब दोबारा सुनवाई शुरू हुई तो फाइल से केस डायरी ही गायब थी। काफी प्रयास के बाद भी केस डायरी नहीं मिल सकी। कोर्ट ने दूसरी प्रति मांगी तो वह भी थाने के रिकॉर्ड से गायब थी।
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विवेचक और अन्य गवाहों को भी सम्मन भेजे गए, लेकिन गवाहों का पता नहीं लग सका। पीड़िता, उसके पिता और मेडिकल करने वाली डॉक्टर ने कोर्ट में जो बयान दिए वह सजा के लिए काफी थे। इन्हीं बयानों के आधार पर कोर्ट ने पति-पत्नी को दोषी मानकर सजा सुनाई।
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