अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या एक की न्यायाधीश रेनू सिंह ने बुधवार को विवाहिता का जलाकर मारने के दोषी पति व ससुर को उम्रकैद व अर्थदंड सुनाया। मामले में कोर्ट ने सास को भी दोष सिद्ध करार दिया, लेकिन वह कोर्ट में हाजिर नहीं रही। उसके खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती अधिपत्र जारी करने के आदेश दिए हैं।
वादी रामप्रकाश यादव ने चौबिया थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पुत्री रुकमा देवी की शादी एक मई 2012 को चौबिया थाना क्षेत्र के गांव मोतीराम निवासी अशोक कुमार पुत्र अहिबरन सिंह के साथ हुई थी। शादी के बाद से उसकी पुत्री को एक लाख रुपये दहेज व सोने की जंजीर के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा।
शादी के करीब एक महीने बाद ही 3 जून 2012 को उसकी पुत्री के पति अशोक कुमार, ससुर अहिबरन, जेठ बृजेश कुमार, ननद सीमा, सास व जेठानी ने जलाकर हत्या कर दी। सूचना मिलने पर जब वे पुत्री के ससुराल पहुंचे तो उसे पुत्री नहीं मिली। पता चला कि चौबिया गांव के एक मकान में जली पड़ी है।
वहां जाने पर उसे उसकी पुत्री जली हुई मृत अवस्था में पड़ी मिली। पुलिस ने जांच के बाद पति अशोक कुमार, ससुर अहिबरन व सास सोना देवी के खिलाफ दहेज हत्या समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर कोर्ट में आरोपपत्र प्रस्तुत किया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अजीत प्रताप सिंह तोमर ने बताया कि कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना और बुधवार को तीनों आरोपियों को दोषसिद्ध करार दिया। अशोक कुमार व अहिबरन सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। दोनों दोषियों को 4-4 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।
कोर्ट में तीसरी दोषसिद्ध सोना देवी गैर हाजिर रही। इस पर कोर्ट ने सोना देवी की पत्रावली को पृथक करने, गैर जमानतीय अधिपत्र व जमानतदारों को नोटिस जारी करने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश के अनुपालन के लिए एसएसपी को पत्र प्रेषित किया जाए। सोना देवी के कोर्ट में उपस्थित होने पर दंडादेश पारित किया जाएगा।