जिले के थानों में लगे मानवाधिकार बोर्ड और शिकायती
पत्र-पेटिकाएं जागरूकता के अभाव में दिखावा बने हैं। बोर्ड पर लिखे
दिशा-निर्देशों का पुलिस के अधिकारी किस हद तक पालन करते हैं, वह स्वयं
जानते हैं। ऐसे में हर साल 10 दिसंबर को ‘सभी मनुष्य बराबर हैं और उनके
कुछ मूलभूत अधिकार एवं स्वतंत्रताएं हैं, जिनकी रक्षा बगैर किसी भेदभाव
होनी चाहिए’ शपथ लेकर रस्म अदायगी जरूर कर ली जाती है।
विदित हो कि
प्रदेश के सभी थानों में मानवाधिकार से संबंधित बोर्ड लगवाये गए हैं। अंकित
मार्गदर्शक बिंदुओं का पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों को किसी व्यक्ति
की गिरफ्तारी, तलाशी आदि के मामले में पालन करना होता है। थाने में लगे इन
बोर्डों पर लिखे बिंदुओं का शायद ही कहीं पालन होता हो।
शिकायत-पेटिकाएं
थानों पर इस मकसद से लगवाई गई थीं कि ऐसी शिकायतें, जिनको लोग डर की बजह से
सामने आकर नहीं दे सकते हैं। इन पेटिकाओं में डाल सकें। पेटिकाओं की चाभी
पुलिस उपाधीक्षक के पास रखे जाने की व्यवस्था भी की गई है। भोगनीपुर
कोतवाली के इंसपेक्टर
अनिल कुमार ने कहा है कि किसी भी मामले में
मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो, इस बात का पूरीतरह खयाल रखा जाता है। पेटिका
में कभी कभार शिकायती पत्र मिलते हैं, उन पर कार्रवाई की जाती है।