मुल्क की आजादी के 70 साल बाद भी भारतीय रेलवे के पास सम्पन्न साधन नहीं हैं। कहने भर को भारत का रेलवे नेटवर्क विश्व में द्वितिय स्थान पर आता है।
यह हकीकत रविवार को एक बार फिर सामने आ गई। आरपीएफ पोस्ट उन्नाव के अधिकारी/कर्मचारी क्षेत्र में बढ़ रहे अपराध पर अंकुश लगाने के लिए संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।
करीब 40 किमी लंबे परिक्षेत्र में फैले रेलवे ट्रैक की निगरानी की जिम्मेदारी इस पोस्ट पर है, लेकिन मौके पर पहुंचने को विभाग के पास एक चार पहिया वाहन तक नहीं है। यहां अफसर यही प्रार्थना करते हैं कि हे ‘प्रभु’ एक चौपहिया वाहन दिला दो।
उन्नाव स्टेशन पर स्थापित आरपीएफ पोस्ट का कार्यक्षेत्र लखनऊ रूट पर पिपरसंड, रायबरेली रूट पर कोरारी हाल्ट व बालामऊ रूट पर माखी तक है। भारी भरकम फोर्स तैनात होने के बाद भी स्थानीय स्तर पर पोस्ट में एक अदद वाहन की व्यवस्था नहीं है।
आरपीएफ के पास एक बाइक के अलावा कोई अन्य वाहन मौजूद नहीं है। जिससे कोई घटना होने पर रेलवे पुलिस के अधिकारियों से लेकर सिपाहियों तक को ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत रायबरेली व बालामऊ रूट पर पहुंचने में आती हैं। क्योंकि इन रूटों पर ट्रेनों की संख्या काफी कम है। इसलिए यहां तक पहुंचने के लिए आरपीएफ कर्मियों को अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ता है।
कानुपर-लखनऊ रूट पर तो भले ही मेमू का सहारा है, लेकिन कई बार मेमू के घंटों लेट होने पर भी समस्या बढ़ जाती है। विभागीय अफसरों की मानें तो कई सालों से वाहनों के लिए प्रपोजल बनाकर मुख्यालय भेजा जा रहा है, लेकिन बजट का रोना बताकर वापस कर दिया जाता है। आरपीएफ उन्नाव पोस्ट के प्रभारी श्रीनिवास मिश्रा ने कहा कि वाहन बिना क्षेत्र में बढ़ रहे अपराधों पर शिकंजा कसने में परेशानी होती है।