उन्नाव जिले में एएनएम का टोटा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का संचालन किस तरह हो और उन्हें मुकाम तक कैसे पहुंचाया जाए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लिए यह बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर यदि गौर किया जाए तो जिले में अभी 50 एएनएम की कमी है। उनकी नियुक्ति होने के बाद ही योजनाओं को सफल बनाया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की सबसे अहम योजना टीकाकरण की जिम्मेदारी एएनएम के कंधों पर है। वह टीकाकरण चाहे गर्भवती महिलाओं व बच्चों से संबंधित हो या फिर दिमागी बुखार से। बिना एएनएम के यह अभियान पूरा नहीं किया जा सकता।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो अचलगंज में तीन, असोहा में पांच, औरास में दो, बिछिया में तीन, बीघापुर में पांच, फतेहपुर चौरासी में एक, हसनगंज में तीन, हिलौली व मियागंज में सात-सात, नवाबगंज में एक, पुरवा में चार, सफीपुर में तीन, सिकंदरपुर सरोसी में एक, सुमेरपुर में पांच पद रिक्त पड़े हुए हैं। इन पदों के रिक्त होने से कार्य में तेजी नहीं आ पा रही है। 19 दिसंबर से जिले में दिमागी बुखार के टीके लगाए जाने हैं। इसके लिए जिले में 10 लाख 668 बच्चों को चिन्ह्ति किया गया है। जब एएनएम ही नहीं होंगी तो लक्ष्य कैसे पूरा हो पाएगा। स्वास्थ्य विभाग के लिए यह बड़ी चुनौती है।