कानपुर के गोविंद नगर का एक प्रतिष्ठित होटल लॉकडाउन के बाद से 31 अगस्त तक नहीं खुला। कारोबार न होने से होटल संचालक ने इसे पूरी तरह बंद कर दिया था। अब यह होटल एक सितंबर से चालू हुआ है। सिर्फ आठ लोगों का स्टाफ बुलाया गया है। मार्च में 40 से ज्यादा कर्मचारी थे।
यानी बाकी कर्मचारियों के रोजगार का रास्ता अभी साफ नहीं है। यही स्थिति शहर के 50 से ज्यादा होटलों की है। कोरोना ने होटल इंडस्ट्री को तबाह कर दिया है। कारोबारी बताते हैं कि लॉकडाउन के बाद से अब तक (पांच महीने में) बीते वर्ष की तुलना में 25 फीसदी भी कारोबार नहीं हुआ है।
यानी टर्नओवर में 75 फीसदी की गिरावट है। शहर के कई होटलों की स्थिति यह है कि हफ्तों बीत जाते हैं, कोई ठहरने नहीं आता है। रेलवे स्टेशन, बस अड्डा तथा हाईवे किनारे के होटल तो फिर भी चल जा रहे हैं लेकिन शहर के अंदर के होटलों में सन्नाटा पसरा रहता है। इसका सीधा असर कर्मचारियों के रोजगार पर पड़ा है। अधिकतर सभी होटलों में 30 से 70 फीसदी स्टाफ की कटौती कर दी गई है। जो कर्मचारी काम भी कर रहे हैं, उनका कहीं 25 फीसदी तो कहीं 50 फीसदी तक वेतन कटौती हुई है।
बीते वर्ष हर महीने औसत एक हजार ग्राहक होटल में ठहरता था। लेकिर अभी अगस्त में दो सौ ग्राहक भी नहीं आए। इस हिसाब से देखें तो मेरा 80 फीसदी टर्नओवर कम हुआ है। काम न होने से आसपास के जिलों के कर्मचारी लौट गए। सिर्फ बिहार के कुछ रसोइया बचे हैं।
जय हेमराजानी, होटल संजय, गोविंद नगर
होटलों में ठहरने वाले ही नहीं आ रहे तो कर्मचारियों की जरूरत भी नहीं पड़ रही है। गिने चुने कर्मचारी बचे हैं। उनके लिए भी वेतन देने का संकट है। होटल के मेंटिनेंस का खर्चा निकालना तक मुश्किल पड़ रहा है। स्टाफ और टर्नओवर में 60 फीसदी तक की गिरावट है।
देशदीप बाधवा, होटल सेलेब्रेशन, 80 फीट रोड