लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर डिवाइडर के पेड़ों की छंटाई और घास की सफाई की जा रही है। शनिवार की सुबह नौ बजे से बेहटामुजावर थाना क्षेत्र में ढोलउवा गांव के पास काम चल रहा था। श्रमिक किलोमीटर संख्या 257 और 258 के बीच काम कर रहे थे। सुबह करीब 10:30 बजे लखनऊ से आगरा की ओर जा रही हरियाणा के रजिस्ट्रेशन नंबर की तेज रफ्तार अर्टिगा कार छह श्रमिकों को रौंदते हुए घटनास्थल से करीब 60 मीटर दूर दूसरी लेन में जाकर पलट गई। हादसे में बेहटामुजावर थाना के राजाखेड़ा निवासी मुनेश (43), कृष्णपाल (50), राकेश (40), झब्बाखेड़ा गांव के रामकिशोर (41), लवकुश (40), अकबर खेड़ा निवासी श्रवण (30) घायल हो गए। कार में फंसा एक श्रमिक करीब 40 मीटर दूर घिसटता चला गया। सूचना पर रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची लेकिन तब तक मुनेश, रामकिशोर, लवकुश, और श्रवण की मौत हो चुकी थी। घायल कृष्णपाल और राकेश को एंबुलेंस से औरास सीएचसी पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद लखनऊ ट्राॅमा सेंटर रेफर कर दिया गया।
हादसे की सूचना पर करीब साढ़े 11 बजे पहुंचे मृतकों के परिजन और आक्रोशित ग्रामीणों ने शव नहीं हटाने दिए और वहीं सड़क पर बैठ गए। परिजनों ने लापरवाही बरतने वाली ठेका कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और मृतक आश्रितों को मुआवजे की मांग पर अड़ गए। एएसपी अखिलेश सिंह सहित कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची और जाम खुलवाने का प्रयास किया लेकिन लोग नहीं माने।
इसके बाद यूपीडा के मुख्य सुरक्षा अधिकारी रमेशचंद्र दुबे, प्रभात कुमार अवस्थी भी पहुंचे। मृतकों के परिजनों ने दस सूत्री मांगपत्र दिया और यूपीडा के मुख्य सुरक्षा अधिकारियों और एसडीएम ने लिखित आश्वासन दिया इसके बाद दोपहर एक बजे शवों को एक्सप्रेसवे से हटाया जा सका और फिर यातायात शुरू कराया गया। इस दौरान करीब डेढ़ घंटे तक एक्सप्रेसवे पर दोनों तरफ का यातायात ठप रहा। अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि समझाने पर मृतकों के परिजन और ग्रामीण शांत हुए हैं। शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। मृतक आश्रितों और घायलों की हर संभव मदद दी जाएगी। डीएम गौरांग राठी ने बताया कि मृतक आश्रितों को हर संभव मुआवजा दिलाया जाएगा। इसके अलावा उन्हें आवास की सुविधा भी दी जाएगी।