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Etawah: 29 घंटे बाद यमुना में कूदे नगर पालिका कर्मी का शव बरामद, सुसाइड नोट में लगाया था प्रताड़ना का आरोप

Sat, 27 Sep 2025 12:15 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा

सार

Etawah News: नगर पालिका के वरिष्ठ लिपिक और कर्मचारी नेता राजीव यादव, जिन्होंने शुक्रवार सुबह यमुना नदी में छलांग लगाई थी। उनका शव शनिवार सुबह बरामद कर लिया गया है। मगरमच्छों के चलते गोताखोरों को दिक्कत हुई थी, जिसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था।
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घटना के बाद लगी भीड़ - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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इटावा जिले में नगर पालिका के वरिष्ठ लिपिक और कर्मचारी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव यादव का शव 29 घंटे बाद शनिवार सुबह यमुना नदी से बरामद कर लिया गया है। उन्होंने शुक्रवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे पुल से यमुना नदी में छलांग लगा दी थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है।

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बता दें कि शुक्रवार शाम करीब पांच बजे राजीव यादव के यमुना में कूदने की सूचना मिलते ही सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र बहादुर, एसडीएम सदर विक्रम राघव और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक यशवंत सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी यमुना पुल पर पहुंच गए थे। शुक्रवार को स्थानीय गोताखोरों से तलाश शुरू कराई गई, लेकिन नदी में मगरमच्छ होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी।

दो अलग-अलग बोट्स की गई तलाश
इसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने सुबह 10 बजे से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। दो अलग-अलग बोट्स की मदद से रात तक उनकी तलाश की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली थी। एसडीएम सदर विक्रम राघव ने बताया था कि रात भर टीमें लगी रहीं और आखिरकार शनिवार सुबह कर्मचारी का शव बरामद कर लिया गया।

मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में लिखा, परेशान होकर दे रहा जान
नगर पालिका में वरिष्ठ लिपिक राजीव यादव ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में लिखा है कि वरिष्ठता के आधार पर नगर पालिका प्रबंधन से अपना प्रमोशन मांगा था। प्रमोशन नहीं मिलने पर अप्रैल में हाईकोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट का आदेश नहीं मानने पर हाईकोर्ट ने नगर पालिका अध्यक्ष को जुलाई के अंत में अवमानना का नोटिस जारी किया था।

मानसिक रूप से किया प्रताड़ित
आरोप लगाया कि नगर पालिका अध्यक्ष के पति कुलदीप गुप्ता ने उनकी दस्तावेज सर्विस बुक निकलवाकर उसकी प्रति आशीष कुमार निवासी मड़ैया ख्यालीराम को देकर फर्जी तरीके से स्थायी पद पाने की शिकायत कराई थी। इसके बाद से ईओ संतोष मिश्रा ने एक माह में चार नोटिस जारी करके मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
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मेरी मौत के लिए पांच लोग जिम्मेदार
अगस्त माह का वेतन भी नहीं दिया गया। इससे मैं मधुमेह और प्रोस्टेट की बीमारी का इलाज नहीं करा पा रहा था। मेरी दिमागी और शारीरिक हालत ठीक नहीं रह रही है। इसलिए चेयरमैन, उनके पति, ईओ, सेवानिवृत्त पेशकार अतर सिंह सेंगर, सेवानिवृत्त प्रभारी कार्यालय अधीक्षक सुनील वर्मा से परेशान होकर मैं जान दे रहा हूं। मेरी मौत के लिए जिम्मेदार यही पांचों लोग हैं।
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