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Kanpur News: आईआईटी से क्रोमियम के दंश से निजात दिलवाने की उम्मीद

Wed, 08 Jul 2026 02:00 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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रनियां (कानपुर देहात)। कानपुर आईआईटी के वैज्ञानिकों की टीम क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में बृहस्पतिवार को पहुंचेगी। टीम प्रभावित क्षेत्र में सर्वे करने के बाद तीन चरण में काम करेगी। इसमें भूजल, दूषित हवा और मिट्टी में मिश्रित क्रोमियम को शुद्ध करना शामिल है। फिलहाल टीम पहले चरण पर काम करने से पहले खानचंद्रपुर में डंप स्थल व कुंभी में निस्तारण केंद्र भी देखेगी। इसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस पहल से ग्रामीणों में क्रोमियम के दंश से मुक्ति मिलने की आस जगी है।
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विशेषज्ञों की टीम के आने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने क्रोमियम डंप स्थल पर बैरिकेडिंग करा दी है। जिससे कोई भी व्यक्ति या मवेशी क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र में जा सकें हालांकि खानचंद्रपुर रोड पर सड़क निर्माण के दौरान दूषित मिट्टी की गई भराई खतरा बनी हुई है। बता दें कि रनियां के खानचंदपुर में मटियामऊ मार्ग किनारे खुले में दो दशक तक क्रोमियम कचरा पड़ा रहा। बारिश में इससे हुआ रिसाव भूगर्भ तक पहुंचा और इसकी वजह से खानचंद्रपुर व उसके आसपास के गांवों का भूजल दूषित हो गया। स्थिति यह बन गई गांवों में लगे हैंडपंपों से निकलने वाले पानी ने रंग बदल दिया। कहीं मटमैला तो कहीं पीला पानी निकलने लगा।
दूषित पानी का इस्तेमाल करने से लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने लगा तो एनजीटी ने संज्ञान लिया था। इसके बाद जनवरी 2023 से मई 2023 में दो किस्तों में 89000 मीट्रिक टन व भारत ऑयल कंपनी 5500 मीट्रिक टन क्रोमियम युक्त कचरे की उठान कर कुंभी स्थित कचरा निस्तारण केंद्र में जमा किया था। मौके पर बचे मिट्टी मिश्रित क्रोमियम के निस्तारण के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानपुर नगर की टीम सर्वे नहीं कर पाई है। हाल ही में हुई बारिश का पानी भी डंप स्थल में भरा है जोकि समय के साथ जमीन के अंदर पहुंच कर भूजल को प्रभावित करेगा। अनदेखी के चलते क्रोमियम के प्रकोप का क्षेत्रफल लगातार बढ़ता जा रहा है।
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अब तक खानचंद्रपुर, चौहनपुरवा, पालपुरवा, यादवपुरवा, शिवनाथपुरवा, घारमपुर व रनियां के चार वार्डों सहित अन्य स्थानों के 947 लोगों में मानक से अधिक क्रोमियम, 48 लोगों में मानक से अधिक मर्करी व 25 लोगों में फ्लोराइड पहुंच चुका है। जबकि अभी 270 लोगों की जांच रिपोर्ट आनी शेष है। क्रोमियम के बढ़ते प्रभाव से स्थानीय लोग चिंतित हैं। उनका कहना है कि क्रोमियम से भूजल खराब होने की जानकारी पर दिल्ली आईटीआई से लेकर जर्मनी के वैज्ञानिकों ने प्रभावित क्षेत्र का सर्वे किया। किसी भी टीम ने उनकी समस्या का समाधान नहीं करवाया। अब आईआईटी कानपुर की टीम को प्रभावित क्षेत्र को क्रोमियम मुक्त करने की जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि इस बार उनको क्रोमियम के दंश से मुक्ति मिल सकेगी।
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बोले ग्रामीण
नहीं लगवाया आरओ प्लांट
क्रोमियम की वजह से पानी दूषित होने के बाद प्रशासन की ओर से पानी की टंकी से दिन में तीन बार आपूर्ति की जा रही है। कई बार सप्लाई का पानी भी बेस्वाद आता है। कुछ लोग पानी खरीद कर इस्तेमाल कर लेते हैं लेकिन अन्य लोगों को वही पानी पीना पड़ता है। कई बार मांग के बाद भी आरओ प्लांट नहीं लगवाया गया, अब आईआईटी कानपुर की जांच के बाद पानी शुद्ध किए जाने की आस है। - हरिश्चंद्र पाल
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आज भी मवेशियों को मजबूरी में क्रोमियम युक्त पानी पिलाना पड़ रहा है। वहीं खानचंदपुर में सड़क किनारे पड़ी मिट्टी का रंग भी पूरी तरह से पीला पड़ गया है। हवा के साथ यह मिट्टी लोगों के घरों में पहुंचती है। आईआईटी कानपुर की टीम से औद्योगिक क्षेत्र की मिट्टी व हवा स्वच्छ बनाने की आस है। - शशिवेंद्र कुमार
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जिम्मेदारों की अनदेखी आईआईटी के लिए चुनौती
खानचंदपुर में डंप किए गए क्रोमियम युक्त कचरे के दुष्प्रभाव से अंजान लोगों ने पहले घरों के निर्माण के लिए भराव व सड़कों के निर्माण में प्रयोग कर लिया है। वहीं जिम्मेदारों की ओर से किस्तों में करवाए गए क्रोमियम युक्त कचरे के निस्तारण ने रनियां को विश्व का दूसरा सबसे घातक स्थान बना दिया है, जहां इतनी मात्रा में भूजल क्रोमियम की वजह से दूषित हुआ है। जोकि समय के साथ बढ़ रहा है। इससे निपटना आईआईटी कानपुर के लिए चुनौती बनेगा।
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दिल्ली आईआईटी भी कर चुकी भूजल को स्वच्छ करने पर काम
दिल्ली आईआईटी की रामानुजन फैकल्टी के प्रोफेसर डॉ. पंकज गुप्ता ने क्रोमियम युक्त भूजल को स्वच्छ करने का दावा किया था। उन्होंने बताया कि क्रोमियम डंप स्थल के पास की जमीन पर 60 फीट गहरी चार बोरिंग की गई थीं। इसमें ई माइक्रोबायोम विधि के तहत सूक्ष्म जीव छोड़े गए थे। वहीं मिट्टी की ऊपरी सतह पर बिटवर, साइफ्रस, साइनाडोम, टाइफा, एलफेरा सहित छह प्रकार की घास लगाई गई थी। सूक्ष्म जीवों ने पानी को स्वच्छ बनाया था जबकि घास ने जमीन उपजाऊ बनाई थी। प्रोजेक्ट सफल होने के बाद उनकी ओर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कई बार डंप स्थल पर काम करने की अनुमति मांगी लेकिन उनको जमीन नहीं दी गई। इससे टीम काम नहीं कर सकी।
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बयान.......
मौके पर पड़े मिट्टी मिश्रित क्रोमियम के निस्तारण के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया गया था। अब तक टीम नहीं आई थी। आईआईटी कानपुर की टीम गुरुवार को रनियां आने की संभावना है। उनकी टीम आईआईटी कानपुर टीम का खानचंद्रपुर का सर्वे करवाने में सहयोग करेगी। जल्द ही पहले चरण पर काम शुरू किया जाएगा। - मनोज चौरसिया, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
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