कानपुर में मूलगंज चौराहा से कोतवाली चौराहा जाने वाली सड़क के बाएं तरफ स्थित बिसाती बाजार में होली की रौनक नजर आने लगी है। यहीं से शहर के अलावा दो सौ किलोमीटर दायरे में आने वाले जिलों में पिचकारी, मुखौटा, अलग-अलग प्रकार की टोपियों की बिक्री की जाती है। खास बात यह है कि यहां पर सभी दुकानदार मुस्लिम हैं जो हिंदुओं के त्योहारों के उत्पाद बेचते हैं।
हर होली यहां सौहार्द के रंग बिखरते हैं। कभी यहां पर जंगल था लेकिन धीरे-धीरे साज-सज्जा के सामान की बिक्री शुरू हो गई। आजादी के पहले से स्थापित इस बाजार में पहले पांच-छह दुकानें थीं, अब 50 से ज्यादा दुकानें हैं। बाजार में त्योहार के अनुसार उत्पाद बिकते हैं। होली आने पर अलग-अलग प्रकार की पिचकारी, दिवाली पर बंदूकें, राखी पर राखियां और जन्माष्टमी पर पर्व से जुड़े उत्पादों की बिक्री होती है।
इसके अलावा साल भर यहां पर खिलौनों की बिक्री की जाती है। समय के साथ बाजार भी बदल रहा है। वर्षों पहले यहां पर स्टील और लोहे की बनी टंकी वाली पिचकारियों की बिक्री होती थी। इसके बाद चीन की पिचकारियों की बिक्री शुरू हुई गई। देश के मेड इन इंडिया पर फोकस होने के बाद पांच साल से दिल्ली और आसपास की बनी कंपनियों की पिचकारियों की बिक्री होती है। होली पर 50 लाख से ज्यादा का कारोबार होता है। मेस्टन रोड पर भी पिचकारियां अब बिकने लगी हैं।
ईद से ज्यादा रौनक होली में
कारोबारियों ने बताया कि पहले बाजार में साज सज्जा का सामान बिकता था। इसी के चलते इसका नाम बिसाती बाजार पड़ा। हालांकि ईद पर इतनी रौनक नहीं होती है जितनी होली पर होती है। कारोबारियों के मुताबिक ईद-बकरीद पर यहां सन्नाटा रहता है क्योंकि यहां पर हिंदू त्योहार से जुड़े उत्पाद ही बिकते हैं।
बिसाती बाजार बहुत ही समृद्घ बाजार है। दशकों पुराने इस बाजार में सभी कारोबारी मिलजुल कर व्यापार करते हैं। समय के साथ बाजार बढ़ा है। यहां पर सभी मुस्लिम व्यापारी हैं जो अलग-अलग त्योहारों के अनुरूप उत्पादों की बिक्री करते हैं। यहां से शहर के अलावा जिलों में पिचकारी, मुखौटा, टोपी जाती है। - हाजी शकील, अध्यक्ष, मर्चेंट एसोसिएशन बिसाती बाजार
परिवार के साथ ही कारोबार को आगे बढ़ा रहे हैं। समय के साथ उत्पाद बदलते जा रहे हैं। अब दिल्ली, कोलकाता में बनने वाली पिचकारियां ही बाजार में हैं। चीन की पिचकारी का बाजार खत्म हो गया है। सालों पहले स्टील की टंकी वाली और प्रेशर पिचकारियां खूब बिकती थीं। - मोहम्मद दानिश, पिचकारी कारोबारी