लेकिन उनके घर पर पुलिस की आवाजाही बढ़ी तो वे परेशान हो गए। लंबे वक्त से बर्रा थाना क्षेत्र में रहने के कारण 2008 में रसूलाबाद थाना पुलिस ने हिस्ट्रीशीट बर्रा थाने में ट्रांसफर कर दी। इसके बाद से पुलिस कभी उनका शांति भंग में चालान कर देती है तो कभी उनकी स्थिति जानने के लिए घर में दबिश दे रही है।
हत्या और लूट के मुकदमे में कोर्ट ने किया था बरी
उन्होंने बताया कि 1984 में उनकी उम्र करीब 16 वर्ष थी। उस वक्त पास के गांव में डकैती व हत्या हुई थी। पीड़ितों ने उनके पिता, उनके व आधा दर्जन अन्य लोगों के खिलाफ हत्या व डकैती में ककवन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हालांकि 1987 में कोर्ट ने सभी को मुकदमे से बरी कर दिया था। इसके आदेश की कॉपी भी वे अधिकारियों को दिखा चुके हैं। इसके बाद भी उनके खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोल दी गई।
पुलिस अधिकारी हर बार देते रहे गोलमोल जवाब
विनोद के अनुसार उन्होंने जन सुनवाई पोर्टल और आरटीआई के तहत भी अपने ऊपर लगे मुकदमों की जानकारी बर्रा, रसूलाबाद और ककवन थानों से मांगी। सभी अधिकारियों ने हर बार सिर्फ गोलमोल जवाब दिया। बर्रा पुलिस रसूलाबाद पुलिस पर और रसूलाबाद पुलिस ककवन पुलिस के पाले में गेंद डालकर अपना पल्ला झाड़ती रही।
मामले की जांच कराई जाएगी। यदि अभियुक्त के खिलाफ एक भी मुकदमा नहीं है तो हिस्ट्रीशीट बंद की जाएगी।
रवीना त्यागी, डीसीपी साउथ