कैप्सूल पनकी इंडस्ट्रियल एरिया में तैयार किया गया है। इनर सेल में संस्थान की उपलब्धियों का ब्योरा रखने के बाद उसमें नाइट्रोजन गैस भरी जाएगी।। नाइट्रोजन गैस भरी होने से जमीन के अंदर दस्तावेजों की सॉफ्ट और हॉर्ड कॉपी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी।
हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के 100 साल के सुनहरे इतिहास को संजोने के लिए संस्थान ने अनूठी व्यवस्था की है। संस्थान की उपलब्धियों को 400 किलो के एक कैप्सूल में रखा जाएगा। संस्थान में बने 60 फीट ऊंचे शताब्दी स्तंभ में इसे सुरक्षित किया जाएगा।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रिमोट दबाकर इतिहास को सुरक्षित करेंगे। शताब्दी स्तंभ के केंद्र से जमीन के भीतर 10 मीटर गहराई तक पाइप डाला गया है। इस पाइप के भीतर ही गनमेटल से बना कैप्सूल डाला जाएगा। ईस्ट कैंपस में स्तंभ बनाया गया है।
स्तंभ साढ़े तीन मीटर चौड़ा है और इसकी परिधि करीब 12 मीटर है। इसमें जाने के लिए सीढ़ियां लगी हैं।कुलसचिव नीरज सिंह ने बताया कि कैप्सूल की बाहरी सेल का वजन 300 किलो व इनर सेल का वजन 100 किलो है। इनर सेल में संस्थान की उपलब्धियों का ब्योरा रखा जाएगा।
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कैप्सूल पनकी इंडस्ट्रियल एरिया में तैयार किया गया है। इनर सेल में संस्थान की उपलब्धियों का ब्योरा रखने के बाद उसमें नाइट्रोजन गैस भरी जाएगी।। नाइट्रोजन गैस भरी होने से जमीन के अंदर दस्तावेजों की सॉफ्ट और हॉर्ड कॉपी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे जमीन में नमी बढ़ेगी, वैसे-वैसे कैप्सूल और नीचे होता जाएगा। कार्यक्रम में सौ के सिक्के, वेस्ट कैंपस और संस्थान के 100 साल इतिहास को दर्शाती पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा। वेस्ट कैंपस में चार करोड़ 97 लाख की कीमत से बने मल्टीपरपज हॉल का भी शुभारंभ होगा। राष्ट्रपति के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी बड़ी स्क्रीन पर होगा।