कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) कैंपस के हिंदी के छात्र-छात्राएं अब गणेश शंकर विद्यार्थी, गिरिराज किशोर, काका हाथरसी, गोपालदास नीरज जैसी विभूतियों की रचनाओं को पढ़ेंगे। यहां संचालित हिंदी ऑनर्स के कोर्स में बदलाव किया गया है। इसमें भाषा और लिपि का इतिहास, प्राचीन से आधुनिक साहित्य, काव्यशास्त्र, कार्यालयी हिंदी, अनुवाद विज्ञान आदि शामिल हैं।
हिंदी ऑनर्स के लिए अब तक कोई स्थाई कोर्स निर्धारित नहीं था। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के निर्देश पर पाठ्यक्रम को विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद और भाषा संकाय ने मिलकर अंतिम रूप दिया है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बनाया गया है। कोर्स में अवधी, कन्नौजी और ब्रज भाषाओं का सम्मिश्रण है। पाठ्यक्रम बोर्ड ऑफ स्टडीज द्वारा पारित किया गया।
भाषा संकाय के निदेशक डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी के अनुसार यह पाठ्यक्रम हिंदी भाषा के व्यापक अध्ययन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह तीन साल का कोर्स है, जिसमें 30 सीटें निर्धारित हैं। इसी सत्र से लागू किया जाएगा। अकादमिक परिषद के संयोजक प्रो. राकेश शुक्ल ने बताया कि तीन वर्ष के छह सेमेस्टर वाले इस पाठ्यक्रम में 14 कोर कोर्स सहित कुल 25 प्रश्न पत्र निर्धारित किए गए हैं, जिनमें कई वैकल्पिक हैं। विज्ञापन एवं हिंदी, व्यावसायिक कौशल संवर्धन, मानव मूल्य एवं पर्यावरण अध्ययन, भारतीय प्रवासी साहित्य, लोकनाट्य और अस्मितामूलक विमर्श जैसे विषय भी जोड़े गए हैं।
कोर्स को बनाया व्यावहारिक
हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ. श्री प्रकाश मिश्र ने बताया कि क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इसे और अधिक व्यावहारिक बनाया गया है। कानपुर के महान पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी के संस्मरण ‘जल जीवन की झलक’ और पद्मश्री गिरिराज किशोर के उपन्यास ‘बा’ को शामिल किया गया है। तृतीय लिंगी विमर्श और अंतर्संकाय शोध परियोजनाओं को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। प्राध्यापक डॉ. अंजनी कुमार उपाध्याय ने बताया कि इसमें लोकप्रिय साहित्य के साथ गोपालदास नीरज, काका हाथरसी की मंचीय कविता और नरेंद्र कोहली के उपन्यास ‘पुनरारंभ’ को भी स्थान दिया गया है। वहीं डॉ. सुमित चौधरी ने बताया कि डिजिटल साक्षरता, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, रोजगार कौशल और रचनात्मक लेखन को जोड़कर इसे पूर्णतः रोजगारपरक बनाया गया है।