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हिंदी फिल्मों से पिट रहा थिएटर

Sun, 24 Jan 2016 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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बॉलीवुड व थिएटर कलाकार अवतार गिल का कहना है कि हिंदी थिएटर बाकी सभी थिएटरों की तुलना में उपेक्षित है। इसको हिंदी फिल्मों से मुकाबला करना पड़ रहा है इसलिए इसकी हालत खस्ता होती जा रही है।
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छोटे चेहरों को तवज्जो नहीं मिलती। वहीं, मराठी-गुजराती थिएटर फल-फूल रहे हैं। कानपुर थिएटर और नौटंकी का गढ़ रहा है लेकिन अब यहां के हालात भी बिगड़ रहे हैं।

शनिवार को ‘अमर उजाला’ कार्यालय फजलगंज आए  अवतार गिल और हिमानी शिवपुरी ने कहा कि वे जल्द कानपुर के युवाओं को थिएटर के गुर सिखाने फिर आएंगे। द फिल्म्स एंड थिएटर सोसाइटी, दिल्ली के चार दिवसीय ‘रंग कानपुर’ नाट्य समारोह में आए दोनों कलाकारों का ‘अमर उजाला’ में स्वागत किया गया।
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इस मौके पर उन्होंने कलाकार शक्ति सिंह और राहुल भूचर के साथ अपने अनुभव साझा किए। अवतार गिल ने बताया कि वे पिछले 35 सालों से थिएटर कर रहे हैं। अब हिंदी थिएटर में मराठी व अंग्रेजी थिएटर की तरह पैसा नहीं है। यूपी सरकार  थिएटर को सब्सिडी दे। फिल्मों और कहीं-कहीं थिएटर में बढ़ रही अश्लीलता पर कहा कि जनता यह सब पसंद कर रही हैैं।

‘कलाकार को तुरंत रिस्पॉस देता है थिएटर’
हिमानी शिवपुरी ने कहा कि एक कलाकार को हमेशा तालियों का नशा होता है। थिएटर वही नशा है। यहां पैसा नहीं है, पर कलाकार को सभागार में बैठे दर्शकों से तुरंत रिस्पांस मिलता है।

उन्होंने बॉलीवुड कलाकार अनुपम खेर के मसले पर कहा कि अनुपम खेर इस वक्त पॉलीटिकिल हो रहे हैं। उन्होंने फिल्मों में ‘खान कैंप’ पर कहा कि फिल्मों या थिएटर में कोई हिंदू, मुस्लिम नहीं है।  हिमानी ने बताया कि जल्द ही वे आतंकवाद पर बन रही ओमपुरी की फिल्म ‘मॉल’ और ‘पतंग’ में दिखेंगी।

यहां असहिष्णुता नहीं
अवतार गिल ने असहिष्णुता पर आमिर खान और शाहरुख खान के बयानों पर कहा कि यहां असहिष्णुता नहीं है। करन जौहर भी जिस तरह बोल रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि हिन्दुस्तान ही एक देश है जहां सबको बोलने की आजादी है, शायद इसीलिए करन जौहर भी इतनी बात बोल सके। 

अवतार ने बताया कि उनकी नई फिल्म ‘एयरलिफ्ट’ इसी हफ्ते रिलीज हुई है। पंजाबी फिल्म ‘तूफान सिंह’ और मराठी फिल्म ‘धिघाड़ा’ रिलीज होगी। उन्होंने जीवन में सैकड़ों फिल्में कीं, पर अभी तक अपने असली रोल का इंतजार है।

रिश्तों में खुदगर्जी का अंजाम ‘वो लाहौर’
कानपुर (ब्यूरो)। दि फिल्म एंड थिएटर सोसाइटी की ओर से शनिवार को सिविल लाइंस के रागेंद्र स्वरूप ऑडीटोरियम में ‘वो लाहौर’ नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से कलाकारों ने रिश्तों में आई खुदगर्जी से अपनों के नुकसान और उसके बुरे अंजाम को दिखाया।

नाटक में बंटवारे से पहले लाहौर का एक परिवार दिखाया जाता है। परिवार में मां जमुना (शक्ति सिंह) की अहम भूमिका है। उसका सबसे बड़ा पुत्र दीना (हेमंत अग्रवाल) अपनी पत्नी रानी (सोनम कनोत्रा) के कहने पर अपने मंझले मानसिक रूप से कमजोर भाई बिज्जू को ट्रेन में बैठाकर कहीं छोड़ आता है।

सबसे छोटा भाई क्रांतिकारी सूरज एक नाचने-गाने वाली हुमा (अंकिता जुनेजा) से शादी कर लेता है। इससे परिवार नाराज होता है लेकिन मां जमुना सबको एक साथ रखने में सफल होती है। लेकिन, दीना नाराज रहता है और सूरज की मुखबिरी अंग्रेज फौज से कर देता है। अंग्रेज, सूरज को मार देते हैं।

इस खबर से बीमार पिता मास्टर देशबंधु (सचिन जोशी) की मौत हो जाती है। दीना अपनी पत्नी को लेकर पटियाला चला जाता है। फिर भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान हुई हिंसा में किसी की किसी की खैर खबर नहीं होती। घर में अकेले बची जमुना भी कहीं चली जाती है।

अंत में मास्टर देशबंधु का शिष्य टीकम उस सूने घर के मंदिर में दीप जलाकर उसे आबाद करता है। टीकम के किरदार को प्रसिद्ध अभिनेता अवतार गिल ने निभाया है। लेखन निर्देशन अतुल सत्य कौशिक ने किया है।
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