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वृद्ध के आंसू पर हाईकोर्ट पसीजा, अफसर नहीं

Tue, 23 Aug 2016 12:58 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला कानपुर
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अपनी दुख भरी दास्तां बताते चाननलाल अजमानी साथ में उनकी पत्नी कृष्णा देवी (दाएं) और बहू नीलम (बाएं)। - फोटो : With his wife at his sorrowful story explains ajmani Channlal Krishna Devi (right) and daughter Sapphire (left).
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कानपुर। हाईकोर्ट का आदेश तीन महीने से प्रशासनिक और पुलिस अफसरों की रद्दी की टोकरी में पड़ा है। ब्लड कैंसर से जूझ रहे 86 साल के चाननलाल अजमानी उम्र के अंतिम पड़ाव में आराम से बैठने के बजाय बूढ़ी टांगों से छड़ी के सहारे थाने और पुलिस अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस और प्रशासनिक अफसर समस्या सुनने के बजाय दुत्कारते हैं। एसडीएम ने भले ही उनको सताने वाली पौत्रवधू को बेदखल करने का आदेश दिया हो लेकिन अभी तक ऐसा हुआ तो नहीं है।
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कौशलपुरी नजीराबाद निवासी चाननलाल अजमानी और 82 साल की उनकी पत्नी कृष्णा देवी ने पौत्र अमित अजमानी की पत्नी आरती के उत्पीड़न करने पर हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण टंडन और जस्टिस यशवंत वर्मा ने 24 मई 2016 को डीएम कानपुर नगर को आदेश दिया था कि बिना देरी किए वरिष्ठ नागरिक का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम के तहत इस मामले में कार्यवाही की जाए। अफसरों ने इस आदेश पर कोई ध्यान नहीं दिया तो बीमार चाननलाल उनकी चौखट नापते-नापते थक गए। अब तीन महीने बाद एसडीएम सदर ने नजीराबाद पुलिस से पौत्रवधू आरती को घर से बेदखल करने को कहा है। ‘अमर उजाला’ टीम सोमवार को वृद्ध दंपति८ से मिलने पहुंची तो वह अपनी व्यथा सुनाते रो पड़े। बताया कि थाने, सीओ और प्रशासनिक अफसरों के दफ्तर के खूब चक्कर लगाए।

चौकी प्रभारी तो उल्टे उन्हें ही बुढ़ापे में जेल भेजने की धमकी देते हैं। सीनियर सिटीजन के लिए कानून भले ही कुछ बने हों लेकिन अफसर सीधे मुंह बात तक नहीं करते। थाने में अपमान ही मिला। किसी ने नहीं सुनी तो हाईकोर्ट की ­शरण ली। हाईकोर्ट ने व्यथा समझी और डीएम को एक्शन लेने का ऑर्डर दिया। इसके बाद भी तीन माह बीतने पर भी कुछ नहीं हुआ।
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चौकी प्रभारी पर जबरन रखवाने का आरोप
चाननलाल ने बताया कि उन्होंने अपने पौत्र अमित को अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया है। पौत्र और उसकी बीवी के बीच तलाक और दहेज उत्पीड़न का मुकदमा चल रहा है। पौत्र दूसरी जगह किराए पर रहता है। 13 फरवरी को गुमटी चौकी प्रभारी सुजीत मिश्र पौत्र की बीवी आरती को लेकर आए और घर में जबरन रखवा गए। चलते समय धमकी भी दी कि अगर इसेे कुछ कहा तो बुढ़ापे में जेल भेज दिया जाएगा। इसके बाद पौत्रवधू आरती झूठी शिकायतें लेकर चौकी जाती और चौकी प्रभारी घर आकर उन्हें धमकाते रहते। वहीं चौकी इंचार्ज का कहना है कि वह चाननलाल के घर सिर्फ एक बार आरती के बयान लेने गए थे। उन्होंने आरती को घर में जबरन नहीं रखवाया। सभी आरोप झूठे हैं।


बेटे की बहू करती है सेवा
चाननलाल का बेटा विजय दुनिया में नहीं है। विजय के दो बेटे अमित और सुमित हैं। उसकी पत्नी नीलम ही इन दोनों की सेवा करती है। वही दोनों का खाना बनाती है। नीलम का कहना है कि उसके साथ छोटा बेटा सुमित रहता है। सुमित ही ससुर की पैरवी करता है। मकान के दो हिस्से किराए पर उठाने से मिलने वाले पैसे से सास, ससुर और उनका खर्च चलता है। पौत्रवधू के रोज-रोज के झगड़े के कारण कुछ दिन पहले एक किराएदार घर खाली कर चला गया तो किराया भी कम हो गया। ससुर को ब्लड कैंसर और सास को कई बीमारी के कारण दवाओं का काफी खर्च आता है।
पौत्रवधू बोली, मैं कहां जाऊं
चाननलाल के पौत्र अमित और कल्याणपुर निवासी आरती की अंतरजातीय शादी 21 अप्रैल 2013 को हुई थी। इन दोनों की यह दूसरी शादी है। अमित का अपनी पहली पत्नी से तलाक हो चुका है और आरती के पहले पति का निधन हो चुका था। आरती के पहले पति से एक बेटी है। वह नाना-नानी के पास रहती है। आरती का कहना है कि उसे नहीं पता कि उसका पति कहां रहता है। उसके और पति के बीच तलाक और दहेज उत्पीड़न के मुकदमे चल रहे हैं। इसलिए सास ने सोची समझी रणनीति के तहत उसके पति को संपत्ति से बेदखल कराया है। वह सवाल दागती है कि अगर उसे इस घर से निकाला जाएगा तो वह अकेले कहां जाएगी।
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