- कानपुर हिंसा में हुए नुकसान की उपद्रवियों से भरपाई पर हाईकोर्ट की रोक
- अकेले पुलिस की ओर से किए गए आकलन को गलत मानकर हाईकोर्ट ने सुनाया आदेश
- बेगमपुरवा निवासी आरोपी की ओर से वकील ने हाईकोर्ट में दाखिल की थी याचिका
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुई हिंसा के दौरान नुकसान की भरपाई उपद्रवियों से किए जाने के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया है। थानेदारों की ओर से बिना किसी कमेटी के किए गए नुकसान के आकलन को गलत मानकर कोर्ट ने यह आदेश दिया है।
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माना जा रहा है कि ज्यूडीशियल या मजिस्ट्रियल कमेटी की तरफ से क्षति के आकलन के बाद ही पुलिस वसूली कर पाएगी। बाबूपुरवा और यतीमखाना में 20-21 दिसंबर को हुई हिंसा के दौरान तोड़फोड़ और आगजनी में सरकारी और निजी संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ था।
सरकार ने इस नुकसान की भरपाई उपद्रवियों से करने का निर्देश दिया था। पुलिस ने बाबूपुरवा में एक लाख 43 हजार रुपये के नुकसान का आकलन करके वसूली के लिए 45 लोगों को नोटिस भेजा था। यतीखाना में 2.79 लाख के वसूली के लिए 30 लोगों को नोटिस जारी किया गया था।
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बेगमपुरवा निवासी मोहम्मद फैजान की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद नासिर ने आपत्ति करते हुए हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी। नासिर के मुताबिक क्षति का आकलन डीजीपी, डीएम और रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर होना चाहिए था। थानेदारों ने मनमाने तरीके से नुकसान का आकलन करके नोटिस जारी कर दिया। कोर्ट में पुलिस अपने ही आकलन में नुकसान का साक्ष्य नहीं दे पाई। इसकी वजह से कोर्ट ने अगली सुनवाई तक वसूली पर रोक लगा दी है।