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Kanpur: हाईकोर्ट ने पूर्व एसीपी मोहसिन खान के निलंबन पर लगाई रोक, आईआईटी की छात्रा से यौन शोषण का है आरोप

Mon, 12 May 2025 09:52 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

आईआईटी की पीएचडी छात्रा के यौन शोषण के आरोप में पूर्व एसीपी मोहसिन खान के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई थी।
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मोहम्मद मोहसिन खान - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आईआईटी की पीएचडी छात्रा से यौन शोषण के आरोप में फंसे पूर्व एसीपी मोहम्मद मोहसिन खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से राहत मिल गई है। कोर्ट ने उनके निलंबन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मोहसिन खान ने निलंबन को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि किसी महिला से एक्स्ट्रा मैरिटल रिलेशन (विवाहेतर संबंध) रखना नौकरी की शर्तों का उल्लंघन नहीं है।
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आईआईटी की पीएचडी छात्रा ने पूर्व एसीपी मोहसिन के खिलाफ पिछले साल 12 दिसंबर में शादी का झांसा देकर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाकर कल्याणपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मोहसिन पर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने कार्रवाई करते हुए पूर्व एसीपी को तत्काल कानपुर से हटाकर लखनऊ स्थित मुख्यालय से अटैच कर दिया था। पीड़िता ने डीजीपी को मेल भेजकर इंसाफ की मांग की थी। इसके बाद कानपुर पुलिस की रिपोर्ट पर मोहसिन को निलंबित कर दिया गया था। पूर्व एसीपी ने अपने निलंबन को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि किसी महिला से विवाहेतर संबंध रखना नौकरी की शर्तों का उल्लंघन नहीं है।

मोहसिन खान की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता एलपी मिश्रा ने कोर्ट में कहा कि यूपी सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 के नियम 29(1) के तहत पहली शादी के रहते दूसरी शादी करना कदाचार माना जाता है। हालांकि कानूनी रूप से विवाहित रहते हुए किसी दूसरी महिला से संबंध बनाए रखना कदाचार नहीं माना जाता। इसलिए आरोपी एसीपी मोहसिन का निलंबन सही नहीं है। अब मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
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एससी/एसटी आयोग में भी छात्रा ने की है शिकायत
छात्रा ने एससी/एसटी आयोग, नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन समेत कई जगह मामले की ई-मेल के जरिए शिकायत की है। छात्रा ने बताया कि वर्दी का रसूख होने के चलते मोहसिन पर अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। मैं पीड़ित हूं, उल्टा कोर्ट की मदद से मेरे ऊपर ही एफआईआर का आदेश करा दिया है। अब इस मामले को एससी एसटी आयोग, ह्यूमन राइट कमीशन समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर शिकायत की है। जल्द ही सीएम योगी के जनता दरबार में मुलाकात करके कार्रवाई की मांग करूंगी।
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