कानपुर। नगर निगम के फरार चल रहे आगरा निवासी ठेकेदार गोविंद शर्मा को हाईकोर्ट से गुरुवार को फौरी तौर पर राहत मिल गई है। गोविंद की याचिका पर हाईकोर्ट ने अभियोजन को आपत्ति के लिए चार सप्ताह का समय दिया है और अगली सुनवाई होने या चार्जशीट दाखिल होने तक गोविंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
नगर निगम के ठेकेदार और मेसर्स कैला देवी कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर गोविंद कुमार शर्मा के खिलाफ 25 अगस्त को दो एफआईआर दर्ज की गई थीं। एक प्राथमिकी नगर निगम के प्रभारी अधिशासी अभियंता दिवाकर भास्कर ने स्वरूपनगर थाने में फर्म के खिलाफ दर्ज कराई थी। इसमें आरोप है कि गोविंद ने अपनी फर्म के पंजीकरण के समय झूठे कागजात पेश किए। दूसरी रिपोर्ट एस एंड बी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स के किदवईनगर वाई ब्लॉक निवासी सनी सिंह भदौरिया ने फजलगंज थाने में दर्ज कराई थी। इसमें गोविंद शर्मा के साथ संदीप जैन व रज्जन वाजपेई भी नामजद हैं।
आरोप लगाया था कि सनी की ओर से टेंडर डाला गया तो इन लोगों ने वापस लेने का दबाव बनाया। दस लाख रुपये रंगदारी मांगी और एक लाख रुपये वसूले। इन दोनों प्राथमिकी को निरस्त करने के लिए गोविंद ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं। इसमें कहा है कि उसने नियमानुसार पंजीकरण फार्म भरे हैं। उसका रिकॉर्ड बेदाग है। हाईकोर्ट ने अभियोजन को जवाब के लिए चार सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई या मुकदमे में चार्जशीट लगने तक के लिए गोविंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
- तीन दिन से प्रयागराज में मिल रही थी लोकेशन
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गोविंद की लोकेशन तीन दिन से प्रयागराज मिल रही थी। गोविंद ने इस दौरान अपनी बेटी से भी संपर्क किया था। वहीं पुलिस पिछले 10 दिनों से गोविंद की तलाश में आगरा और राजस्थान के अलग-अलग शहरों में दबिश दे रही थी। पुलिस के हाथ अभी तक सिर्फ गोविंद की कार ही लगी थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तारी पर रोक की जानकारी मिली है। आगे की कार्रवाई विधिक राय लेकर की जाएगी।