डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से वर्ष 2005 में बीएड प्रशिक्षण प्राप्त कर इटावा जिले के परिषदीय विद्यालयों में नौकरी करने वाले 23 शिक्षकों की बर्खास्तगी आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।
शिक्षकों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय को आदेश की प्रति प्राप्त कराते हुए प्राथमिक विद्यालयों में पूर्व की भांति तैनाती की मांग की है। उधर, बेसिक बेसिक अधिकारी के मुताबिक इस आदेश के अनुपालन के संबंध में उच्चाधिकारियों से राय मांगी जा रही है।
वर्ष 2005 में आगरा विवि से बीएड प्रशिक्षण प्राप्त कर परिषदीय विद्यालयों में नौकरी करने वाले शिक्षकों की पुलिस महानिदेशक विशेष अनुसंधान दल के आदेश पर जांच कराई गई। जांच में बीएड की डिग्री का सत्यापन कराया गया।
अनुसंधान दल ने जांच में इटावा जिले में 23 शिक्षकों की बीएड 2005 की डिग्री अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर फर्जी पाई। इसकी रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को साैंपी गई। बीएसए अजय कुमार सिंह ने जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद 23 शिक्षकों को दिनांक 4 जनवरी को बर्खास्त कर दिया था।
बीएसए के बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दायर की गई। शिक्षक जितेंद्र सिंह, अजय कुमार, विकास चंद्र, मंजू देवी, सर्वेश कुमार, अभिषेक, मीरा, सत्यप्रकाश्, प्रवेंद्र, धर्मेंद्र सिंह, सतेंद्र कुमार, गिरीश कुमार यादव, राजेश कुमार आदि की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने अपने 17 जनवरी के आदेश में बीएसए के बर्खास्तगी आदेश को स्थगित कर दिया।
याची गणों ने बताया कि उन्होंने आदेश की प्रति बीएसए कार्यालय के सुपुर्द कर दी है। उन्होंने पूर्व में तैनाती स्थल पर ही कार्यभार ग्रहण कराये जाने की मांग की है। बीएसए अजय कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन लेने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।