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हाई ब्लड शुगर से नपुंसकता का खतरा, ये लक्षण दिखाई दें तो सतर्क हो जाएं

Sun, 05 Aug 2018 06:31 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- पैरों की ऊंगलियों में झनझनाहट है खतरे की घंटी
- इलीट क्लास बन रहा डायबिटीज का सॉफ्ट टार्गेट
 
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विस्तार
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डायबिटीज के बाद रोग से होने वाले नुकसान को ठीक करने के लिए सतर्क रहना चाहिए। हाई ब्लड शुगर से व्यक्ति की नसों में खराबी आती है, जिससे नपुंसकता आने लगती है।
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रोगी के पैर में गैंगरीन, अल्सर होते हैं जिससे अंग काटना पड़ सकता है। यह बात एसएन सेन मेडिकल कालेज आगरा के न्यूरोलॉजी डिवीजन के प्रमुख प्रोफेसर पीके माहेश्वरी ने यहां केडीएकॉन-2018 में बताई। उन्होंने बताया कि पैरों की उंगलियों में झनझनाहट तो सतर्क हो जाएं।

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कानपुर डायबिटीज एसोसिएशन के बैनर तले दो दिवसीय केडीएकॉन-2018 का आयोजन मर्चेंट चैंबर हॉल में किया गया। कार्यक्रम के पहले दिन प्रोफेसर माहेश्वरी ने ‘डायबिटिक न्यूरोपैथी-व्हाटस इज न्यू’ विषय पर प्रस्तुति दी।

उन्होंने बताया कि समाज का अभिजात्य तबका जिसे इलीट क्लास कहते हैं, वह डाटबिटीज का सॉफ्ट टार्गट हैं। इसकी वजह स्ट्रेस है। इसके तबके के लोग व्यायाम कम करते हैं, मानसिक कार्य का दबाव अधिक होता है। व्यायाम 40-45 वर्ष की उम्र के बाद करते हैं तब तक रोग लग चुका होता है। अगर पहले व्यायाम करें तो बचाव रहे।
 
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प्रोफेसर माहेश्वरी ने बताया कि डायबिटिक न्यूरोपैथी की शुरुआत पैर के अंगूठे में झनझनाहट से होती है। नर्वस सिस्टम कमजोर पड़ने लगता है। इससे नसों पर बुरा असर आता है, जिससे न्यूरो ट्रांसमीटर सुस्त पड़ जाते हैं और नपुंसकता होने लगती है।

रोगी पक्षाघात का शिकार हो जाता है। उन्होंने सलाह दी कि ऐसे में डायबिटीज को नियंत्रित रखें और एलोपैथ के अलावा दूसरी चिकित्सा पद्धतियों की ऐसी दवाएं न लें जिनका साइड इफैक्ट पता न हो। डायबिटीज के 50 फीसदी रोगियों को न्यूरोपैथी का खतरा रहता है।
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