आप को यह पढ़कर हैरानी होगी कि कानपुर शहर में बंदूक ही नहीं चाकू/ करौली का भी लाइसेंसी है। सिटी मजिस्ट्रेट के ड्राइवर राकेश कुमार यादव अत्याधुनिक हथियारों के इस दौर में भी चाकू पर ज्यादा भरोसा करते हैं। इसीलिए लाइसेंस पर अपने साथ चाकू लेकर चलते हैं। जान से मारने की धमकी मिलने पर उन्होंने 34 साल पहले यह लाइसेंस बनवाया था और अब तक बाकायदा फीस भरकर उसका रिन्यूवल भी कराते हैं।
हाल ही में असलहा लाइसेंस बनवाने और रिन्यूवल कराने की फीस बढ़ाई गई है। शासनादेश में तलवार, कटार, भाला और बल्लभ की फीस भी बढ़ाई गई है। राकेश ने दो सितंबर 1982 का बना चाकू का लाइसेंस दिखाया। उन्होंने बताया कि 1982 में सिटी मजिस्ट्रेट के दफ्तर के पास ही सीजेएम का दफ्तर था। तब मूसानगर के एक बदमाश ने गवाह को गोली मार दी थी। उसे उन्होंने दबोच लिया था। इस पर उसने जान से मारने की धमकी दी थी। तभी सिटी मजिस्ट्रेट ने असलहा लाइसेंस बनवाने को कहा तो उन्होंने चाकू का बनवा लिया।
भाला, कटार के लाइसेंस और रिन्यूवल की फीस बढ़ी
भले ही लोग भाला, कटार, चाकू, तलवार, बल्लभ का लाइसेंस नहीं बनवाते हैं लेकिन सरकार ने इनके लाइसेंस बनवाने और रिन्यूवल की फीस बढ़ा दी है। असलहा विभाग के मुताबिक पहले इनकी रिन्यूवल फीस पांच रुपये साल थी। अब बढ़ाकर लाइसेंस की फीस पांच सौ रुपये और रिन्यूवल की फीस सौ रुपये कर दी है।