हैलट के मल्टी सुपर स्पेशियलटी हॉस्पिटल में हेपेटाइटिस दिवस कार्यक्रम की दीप जलाकर शुरुआत की गईक
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कानपुर। हेपेटाइटिस बी वायरस लिवर को खराब करने के साथ ही संक्रमण से गुर्दे भी खराब कर देता है। इसके अलावा मस्तिष्क और हृदय पर भी बुरा प्रभाव आता है। सोमवार को विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर सेमिनार मल्टी सुपर स्पेशियलिटी एंड पीजीआई में हुए सेमिनार में यह बात जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजीत कुमार निम ने बताई।
डॉ. निम ने बताया कि यह वायरस त्वचा की पर्त, नसों, तंत्रिकाओं में खराबी पैदा करता है। इसका लोड अधिक होने पर खून गाढ़ा हो जाता है। स्वास्थ्य कर्मी सबसे अधिक रिस्क पर होते हैं। संक्रमण से बचने के लिए एहतियात जरूरी है।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय वायरल हेपटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत विभाग हेपेटाइटिस के संपूर्ण इलाज के लिए एक ट्रीटमेंट सेंटर की तरह काम कर रहा है। हेपेटाइटिस ए,बी,सी एवं ई की जांचों एवं इलाज की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। इसके साथ ही हेपेटाइटिस बी से संक्रमित मां से जन्म लेने वाले नवजात शिशु को दिया जाने वाला इंजेक्शन हेपेटाइटिस बी इम्यूनोग्लोबिन भी निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में प्रतिवर्ष लगभग 2400 टेस्ट हेपेटाइटिस बी एवं सी के होते हैं। इनमें लगभग 3.5 प्रतिशत लोग पॉजिटिव पाए जाते हैं। पिछले साल 184 हेपेटाइटिस सी के मरीजों का इलाज किया गया। 140 मरीजों का इलाज चल रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य डॉ. संजय काला, उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि, पीजीआई के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष सिंह ने दीप जलाकर की। कार्यक्रम में डॉ. अश्वनी सेठ, डॉ. हिमांशी एवं डॉ. ध्रुव ठाकुर ने भी व्याख्यान दिया।