कुछ रोगी ठीक हो गए और कुछ की मौत हो गई। इसी से अब प्रदूषण तथा सब्जियों, खाने के सामान में इस्तेमाल किए जा रहे कीटनाशकों के प्रभाव की दिशा में भी शोध शुरू किए गए हैं। कार्डियोकॉन में आए सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव कुमार का कहना है कि प्रदूषण में तमाम तरह की गैसें और धुआं होता है।
इससे हर व्यक्ति पैसिव स्मोकिंग करता है। जरूरी नहीं कि व्यक्ति सिगरेट ही पीता हो। प्रदूषित तत्व दिल के किस हिस्से में दुष्प्रभाव डालते हैं, इसका अभी पता नहीं है। वहीं एसजीपीजीआई लखनऊ की वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रूपाली खन्ना ने बताया कि अभी तक अनजान कारणों के मजबूत नतीजे नहीं आ पाए हैं, लेकिन यह सच है कि केस लगातार मिल रहे हैं।
फरीदाबाद से आए डॉ. सुब्रत अखौरी ने भी यही चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि कुछ रोगियों में रिस्क फैक्टर होते हैं, मसलन वे सिगरेट पीते हैं, डायबिटीज और बीपी है। मोटापा भी है, लेकिन कुछ रोगी ऐसे भी आए जिनमें ये रिस्क फैक्टर नहीं थे और हार्ट अटैक पड़ गया। इस संबंध में उन्होंने जुड़वा भाइयों और दूसरे केस का हवाला भी दिया। इसके अलावा कार्यशाला में आए अन्य विशेषज्ञों ने भी अंजान रिस्क फैक्टर के संबंध में चिंता जताई। इससे कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है। अंजान रिस्क फैक्टर को लेकर ज्यादातर विशेषज्ञों ने खानपान और प्रदूषण पर भी शक जाहिर किया है।
सावधानी
- सिगरेट पीना, तंबाकू का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।
- फास्ट फूड का इस्तेमाल कतई न करें।
- सांस क्रियाएं बढ़ाएं, योग प्राणायाम करें।
- एक ही तेल में बार-बार चीजें मत तलें।
- शरीर को निष्क्रिय न रखें, व्यायाम नियमित करें।
- हार्ट अटैक की हिस्ट्री हो तो पूरे घर की स्क्रीनिंग करा लें।
- बीपी, डायबिटीज हो तो दवाएं नियमित लें।