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अनजान कारणों से पड़ रहे हार्ट अटैक: दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है... डॉक्टर भी ढूंढ रहे जवाब

Mon, 13 Feb 2023 09:13 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल 25 फीसदी रोगी ऐसे आए हैं जिनके हार्ट अटैक के कारण पता नहीं चले। कुछ रोगी ठीक हो गए और कुछ की मौत हो गई। इसी से अब प्रदूषण तथा सब्जियों, खाने के सामान में इस्तेमाल किए जा रहे कीटनाशकों के प्रभाव की दिशा में भी शोध शुरू किए गए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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‘दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है.. आखिर इस दर्द की दवा क्या है?’ शायर मिर्जा गालिब का यह शेर भले ही इश्किया मसले में कहा गया हो लेकिन यह सवाल इस वक्त हृदय रोग विशेषज्ञों को उलझन में डाले हुए है। हार्ट अटैक के मामले एकदम से बढ़े हैं। रोगियों में युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। हृदय रोगों के बहुत से कारण पता हैं जिनका इलाज भी मिल रहा है लेकिन कुछ अनजान कारण हो गए हैं जिनका इलाज अंदाजे पर किया जा रहा है।

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रविवार को कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की कार्यशाला कार्डियोकॉन-2023 के आखिरी दिन विशेषज्ञों ने अज्ञात कारणों पर चिंता जाहिर की। उनका कहना था कि अभी तक इस दिशा में शोध पूरे नहीं हुए हैं। जब तक कोई नतीजा नहीं आ जाता, रोकथाम ही सबसे अच्छा तरीका है। इसके लिए विशेषज्ञों ने गाइडलाइन सुझाई जिससे अनजान कारण विकसित न होने पाएं और दिल मजबूत रहे। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल 25 फीसदी रोगी ऐसे आए हैं जिनके हार्ट अटैक के कारण पता नहीं चले।

कुछ रोगी ठीक हो गए और कुछ की मौत हो गई। इसी से अब प्रदूषण तथा सब्जियों, खाने के सामान में इस्तेमाल किए जा रहे कीटनाशकों के प्रभाव की दिशा में भी शोध शुरू किए गए हैं। कार्डियोकॉन में आए सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव कुमार का कहना है कि प्रदूषण में तमाम तरह की गैसें और धुआं होता है।

इससे हर व्यक्ति पैसिव स्मोकिंग करता है। जरूरी नहीं कि व्यक्ति सिगरेट ही पीता हो। प्रदूषित तत्व दिल के किस हिस्से में दुष्प्रभाव डालते हैं, इसका अभी पता नहीं है। वहीं एसजीपीजीआई लखनऊ की वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रूपाली खन्ना ने बताया कि अभी तक अनजान कारणों के मजबूत नतीजे नहीं आ पाए हैं, लेकिन यह सच है कि केस लगातार मिल रहे हैं।

फरीदाबाद से आए डॉ. सुब्रत अखौरी ने भी यही चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि कुछ रोगियों में रिस्क फैक्टर होते हैं, मसलन वे सिगरेट पीते हैं, डायबिटीज और बीपी है। मोटापा भी है, लेकिन कुछ रोगी ऐसे भी आए जिनमें ये रिस्क फैक्टर नहीं थे और हार्ट अटैक पड़ गया। इस संबंध में उन्होंने जुड़वा भाइयों और दूसरे केस का हवाला भी दिया। इसके अलावा कार्यशाला में आए अन्य विशेषज्ञों ने भी अंजान रिस्क फैक्टर के संबंध में चिंता जताई। इससे कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है। अंजान रिस्क फैक्टर को लेकर ज्यादातर विशेषज्ञों ने खानपान और प्रदूषण पर भी शक जाहिर किया है।

अंदेशा
- वातावरण में फैले प्रदूषित तत्वों का दिल पर पड़ रहा असर
- फसलों में छिड़के जा रहे कीटनाशक हो रहे घातक
- ट्रांस फैटी एसिड बढ़ा रहा है दिल के रोग का खतरा
- माइक्रोवेव में प्लास्टिक के बर्तन में खाना गर्म करना
- शर्ट की ऊपरी जेब में मोबाइल फोन रखना
- स्क्रीन टाइम (मोबाइल फोन, लैपटॉप) अत्याधिक बढ़ जाना
- नींद चक्र का बिगड़ जाना, रात में जागना, दिन में सोना
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सावधानी
- सिगरेट पीना, तंबाकू का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।
- फास्ट फूड का इस्तेमाल कतई न करें।
- सांस क्रियाएं बढ़ाएं, योग प्राणायाम करें।
- एक ही तेल में बार-बार चीजें मत तलें।
- शरीर को निष्क्रिय न रखें, व्यायाम नियमित करें।
- हार्ट अटैक की हिस्ट्री हो तो पूरे घर की स्क्रीनिंग करा लें।
- बीपी, डायबिटीज हो तो दवाएं नियमित लें।
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