कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभागाध्यक्ष और हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सिंह ने अपने अस्पताल में सर्जरी न कराकर नर्सिंगहोम में सर्जरी कराई है। पेशाब की नली में पथरी से जब दर्द के मारे हालत बिगड़ी तो वह पास के ही नर्सिंगहोम में भर्ती हुए और ऑपरेशन कराया। बाद में उन्हें प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक के पद से हटा दिया गया। यह मामला कॉलेज और अस्पतालों में चर्चा का विषय है।
हैलट में रविवार को राउंड लेते वक्त डॉ. आरके सिंह के पथरी का तेज दर्द उठा था। गंभीर हालत में उन्हें हैलट इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। दवा खाने से अधिक पेशाब होने और उल्टी की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। पहले ईएमओ कक्ष में लिटाकर उन्हें ग्लूकोज चढ़ाया गया लेकिन उनका ब्लड प्रेशर गिरता गया। इसके बाद आईसीयू में शिफ्ट कर उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि की अगुवाई में डॉक्टर इलाज करते रहे। इसके बाद कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट शिफ्ट किया गया। हृदय की जांचों में दिक्कत न मिलने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। वह छुट्टी पर चले गए।
रविवार को उनकी हालत फिर बिगड़ी तो वह हैलट आने के बजाय पास के ही एक नर्सिंगहोम में भर्ती हुए। वहां उनका ऑपरेशन किया गया। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि उनकी तबीयत सुबह चार बजे बिगड़ी तो वह पास के नर्सिंगहोम चले गए।
वहीं, कॉलेज और अस्पताल के कैंपस में डॉ. सिंह के नर्सिंगहोम में भर्ती होने की चर्चा सोमवार दिन भर रही। लोग हैलट की व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाते रहे। लोग यह भी कहते रहे कि देर रात जब हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक रहते हुए सर्जरी विभागाध्यक्ष को निजी अस्पताल जाना पड़ा तो रोगियों के साथ क्या होता होगा? अस्पताल के उच्च पदस्थ सूत्र का कहना है कि सर्जरी विभाग के ही एक डॉक्टर ने नर्सिंगहोम में जाकर ऑपरेशन किया है।