डेरापुर। ग्राम पंचायत सब्दलपुर के नवनिर्वाचित प्रधान पर अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लेने की शिकायत जांच में सही पाई गई। प्रधान व उसकी बहन का जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने की रिपोर्ट तहसीलदार ने उच्चाधिकारियों को भेजी है।
सब्दलपुर ग्राम पंचायत के प्रधान का पद इस बार चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। आरोप है कि गांव के शैलेंद्र कुमार ने गड़रिया जाति का होने के बाद भी वर्ष 2015 में अपना व बहन नीलम पाल का अनुसूचित जाति (धनगर) का प्रमाण पत्र तहसील से बनवा लिया। इसके बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रधान पद पर जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नामांकन किया।
जिस पर जीरेपुर गांव के अक्षय कुमार ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे आरक्षित पद पर लाभ लेने का आरोप लगाते हुए जांच कराने की मांग की थी। एसडीएम ऋषिकांत राजवंशी ने तहसीलदार लाल सिंह यादव से रिपोर्ट मांगी थी। तहसीलदार ने जांच में ग्रामीणों से प्रधान की जाति के बारे में जानकारी की तो शिकायत सही मिली।
नवनिर्वाचित प्रधान शैलेंद्र कुमार व उनकी बहन नीलिमा पाल की जाति पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में गड़रिया पाई गई। जब कि एक जनवरी वर्ष 2015 में तहसीलदार हनुमान सिंह ने लेखपाल व कानूनगो की रिपोर्ट के आधार उन्हें अनुसूचित जाति धनगर का प्रमाण पत्र जारी किया था। तहसीलदार लाल सिंह यादव ने बताया कि जाति प्रमाण गलत पाए जाने पर निरस्तीकरण के लिए बीडीओ सहित उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है।
निर्वाचन रद्द कराने को दाखिल करना होगा इलेक्शन पिटीशन
डेरापुर। ब्लॉक के एडीओ पंचायत ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने के लिए रिपोर्ट जिला समाज कल्याण अधिकारी व जिलास्तरीय सत्यापन समिति के पास भेजी गई है। वहां से प्रमाण पत्र निरस्त करने का निर्णय लिया जाएगा। वहीं डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि ग्राम प्रधान पद पर निर्वाचित होने के बाद किसी को सीधे बर्खास्त नहीं किया जा सकता है।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे आरक्षण का लाभ लेेने की स्थिति मेें संबंधित ब्लॉक के एसडीएम न्यायालय मेें इलेक्शन पिटीशन दाखिल करने की प्रक्रिया है। पिटीशन दाखिल करने से पहले मामले के वादी को चालान भरकर डीपीआरओ कार्यालय में देना होगा। जिसे वह अग्रसारित करेंगे। वाद में निर्णय होने के बाद की स्थिति पर फैसला लिया जाएगा।