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अब बस नाम का रह गया खजांची, एक-एक पैसे को मोहताज परिवार

Wed, 08 Nov 2017 03:01 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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अपनी मां की गोद में खजांची
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ये घटना और नाम आज के एक साल पहले रातों-रात चर्चा का विषय बन गया। नोटबंदी की लंबी कतार में पैसे लेने के लिए लाइन में लगी एक महिला को प्रसव पीड़ा हुई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया। लोगों ने उसी स्थान पर बच्चे को नाम दे दिया "खजांची"। खजांची का परिवार आज एक-एक पैसे को मोहताज है। जानें क्या है पूरा मामला...
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नोटबंदी के दौरान कानपुर देहात स्थित पंजाब नेशनल बैंक शाखा के बाहर लाइन में खड़ी नि:शक्त महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया। लाइन में लगे लोगों ने कहा खजांची आ गया. खजांची आ गया.. और इस तरह लोगों ने उसका नामकरण कर दिया "खजांची"। अपने नाम और गरीबी के कारण चर्चा में आए खजांची को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2 लाख रुपये की आर्थिक  मदद दी थी।

केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष नवंबर माह में नोटबंदी की थी, तभी झींझक ब्लॉक क्षेत्र की नि:शक्त सर्वेशा लोहिया आवास की प्रथम किस्त 20 हजार रुपये उठाने के लिए सास शशि देवी के साथ 2 दिसंबर 2016 को झींझक कस्बा स्थित पंजाब नेशनल बैंक में आई थी। बैंक में भीड़ होने के चलते वह लाइन में खड़ी रही। करीब 4 घंटे तक कतार में खड़े रहने के बाद उसने वहीं पर एक बच्चे को जन्म दिया था। जिसके बाद आनन-फानन में बैंक शाखा प्रबंधक एसके चौधरी की सूचना पर पुलिस ने उसे घर पहुंचाया। उसका जन्म बैंक में होने के कारण उसका नाम खजांची नाथ रखा गया, जो पूरे देश में चर्चा का विषय रहा। उस समय सपा सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खजांची की तारीफ करने के साथ उसकी मां सर्वेशा को 24 दिसंबर को लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान 2 लाख रुपये का चेक दिया और हर रैली में खजांची का जिक्र करना नहीं भूले। खजांची के घर लोगों का तांता लगा रहा।
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     उसकी परवरिश के लिए दिए गए दो लाख रुपये परिवार द्वारा लिए गए कर्ज को निपटाने और शेष रकम को बड़ी बेटी की शादी के लिए बैंक में जमा कर दी। खजांची के परिवार की माली हालात ठीक नही है। परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। आज खजांची केवल कहने भर का खजांची है।
वर्तमान में सर्वेशा अपने बच्चों प्रीती (10), शिवा (8) धीरू (6) गगन (4) व खजांची (11) माह के साथ अपनी मां कुसमा भाई जनार्दन के साथ मायके अनंतपुर धौकल गांव में 2 माह से रह कर जीवन बसर कर रही है। सर्वेशा ने बताया कि सरकार से 2 लाख रुपये का चेक मिला था जिस पर सवा लाख रुपये बेटी की शादी के लिए फिक्स करा दिए हैं। पति के इलाज के लिए कर्जा लिया था, उसे अदाकर बेटे शिवा की टीबी की बीमारी का इलाज करा रही है। बताया कि परिवार के लोग उसे परेशान करते हैं, इसलिए वह मायके चली आई है।
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