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यूपी: 48 घंटे से बारिश से हाहाकार, कानपुर-बुंदेलखंड में 13 मौतें, हाईवे और ओवरब्रिज ठप, हाईवे और ओवरब्रिज ठप

Sun, 27 Sep 2026 09:23 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर और बुंदेलखंड समेत पूरे उत्तर प्रदेश में बीते 48 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। बारिश से जुड़े हादसों में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में 13 और पूरे प्रदेश में कुल 58 लोगों की जान चली गई। भारी जलभराव और तेज हवाओं से तिल, उड़द और धान की फसलें बर्बाद हो गई हैं, जबकि हाईवे ओवरब्रिज में दरार आने और पुल टूटने से यातायात व बिजली व्यवस्था बुरी तरह ठप हो गई है।
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गुप्त गोदावरी से गिरता पानी, बारिश से गिरे कच्चे मकान का मलबा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बुंदेलखंड और कानपुर मंडल के जिलों में बृहस्पतिवार शाम से शुरू हुआ बारिश का दौर शनिवार को भी जारी रहा। 48 घंटे से अधिक समय से हो रही बारिश ने कई जिलों में रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस दौरान वर्षा जनित अलग-अलग हादसों में कानपुर-बुंदलेखंड क्षेत्र में 13, अवध क्षेत्र में 26, ब्रज क्षेत्र में तीन, लखीमपुर में छह, गोरखपुर में पांच, लखनऊ, संतकबीरनगर, जौनपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़ में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है।

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प्रदेश में कुल 58 लोगों ने जान गंवाई। कई जिलों में दिन का तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया। इटावा में सितंबर का अब तक का सबसे ठंडा दिन दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि रविवार को भी प्रदेश के कई इलाकों में बारिश के संकेत हैं।

इन लोगों की हुई मौतें
बारिश के कारण बांदा में कच्चा घर ढहने से चुन्नी वर्मा (70) और फतेहपुर में आनंद (6) की मलबे में दबकर मौत हो गई। हमीरपुर के सरीला में संध्या सिंह (65) और कुरारा में पंचम उर्फ रामप्रकाश (65) की कच्चा घर गिरने से दबकर मौत हो गई। हमीरपुर में डूबी हुई फसल देखकर खेत में ही किसान रामपाल सिंह (52) की सदमे से मौत हो गई।

मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर बह रही
घर और दीवार गिरने से महोबा में जयपाल (58) और हरदोई में सुंदरलाल (55) व आरती (50), फर्रुखाबद में एक व्यक्ति की मलबे में दबकर मौत हो गई। हरदोई और कानपुर में तेज बारिश के दौरान हुए सड़क हादसों में चार लोगों की मौत हो गई। कानपुर देहात में 900, औरैया में 650, बांदा में 150, उरई में 50 और फतेहपुर में 50 से अधिक गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित हुई। चित्रकूट में मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

  • हरदोई में सीतापुर रोड पर इटौली पुल की एप्रोच रोड धंस गई है। एहतियात के तौर पर भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है।
  • फर्रुखाबाद में कानपुर-फर्रुखाबाद रेलमार्ग पर पानी भरने से ट्रेनों को कॉशन देकर गुजारा गया।
  • चित्रकूट में मानिकपुर-इटवा मार्ग पर कारी बराह पुल एक बार फिर पानी के तेज बहाव में टूट गया। इससे सतना (मध्य प्रदेश) का संपर्क टूट गया है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर भी कई स्थानों पर पानी भरने से चालकों को परेशानी हई।
  • कानपुर देहात में सिकंदरा के पास कानपुर-इटावा हाईवे के ओवरब्रिज पर 100 मीटर सड़क पर लगभग छह इंच चौड़ी दरार आ गई। इसके बाद इटावा की ओर वाहनों का आवागमन रोक दिया गया।

पूर्वानुमान: आज भी कई इलाकों में बारिश के संकेत

पिछले 48 घंटों में बारिश का रिकॉर्ड
  • हमीरपुर- 457 मिमी
  • कानपुर- 294 मिमी
  • हरदोई- 250 मिमी
  • बांदा- 228 मिमी
  • कन्नौज- 220 मिमी
  • फर्रुखाबाद- 196 मिमी
  • चित्रकूट- 160 मिमी
  • महोबा- 155 मिमी
  • औरैया- 126 मिमी
  • जालौन- 110 मिमी
  • उन्नाव- 166 मिमी
  • फतेहपुर- 97 मिमी
  • इटावा- 86 मिमी
  • कानपुर देहात- 69 मिमी

सोमवार से बारिश में कमी आने की संभावना है। रविवार को कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।  -अतुल कुमार सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, लखनऊ

कानपुर, कन्नौज और हरदोई में टूटा रिकॉर्ड
कानपुर में 55 वर्षों में 26 सितंबर की मानसूनी बारिश ने नया रिकॉर्ड बनाया है। इस दिन 24 घंटे में 204 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसके पहले 26 सितंबर को अधिकतम बारिश वर्ष 1993 में 62 मिमी दर्ज की गई थी। कन्नौज में शनिवार को 76 साल के रिकॉर्ड टूटा। आज 24 घंटे में 220 मिमी बारिश दर्ज की गई। इससे पहले 1950 में 212.3 मिमी दर्ज हुई थी। हरदोई में बारिश ने 66 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। यहां 1960 में 214 मिमी पानी बरसा था। शनिवार को यहां 214.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।
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तिल, ज्वार, उड़द धान की फसलों को नुकसान
बारिश के कारण फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। बांदा-चित्रकूट में तिल और ज्वार की फसल पानी भरने के कारण बर्बाद हो गई है। हमीरपुर और महोबा में उड़द, मूंग, मूंगफली और तिल की फसलों को नुकसान हुआ है। जालौन में बाजरा के साथ ही तिल, उड़द और मूंग की फसल खराब हुई है। फर्रुखाबाद, कन्नौज, हरदोई और फतेहपुर में लता वाली सब्जियों लौकी, कट्टू और तरोई को नुकसान पहुंचा है। कई जिलों में बारिश के दौरान तेज हवा चलने से धान की फसल खेतों में बिछ गई है।
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