दस साल पहले हुए सराफ हत्याकांड में अपर जिला जज कोर्ट संख्या-एक कुसुमलता ने दो आरोपियों राजेंद्र लोध और कन्हैया उर्फ करिया को दोषी करार दिया है। दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साक्ष्य के अभाव में एक शख्स को बरी कर दिया गया। अभियुक्तों पर 32 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माना अदा न करने पर दो-दो साल की अतिरिक्त सजा भी काटनी होगी।
कासिमपुर थाना क्षेत्र के कहली निवासी प्रभादेवी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था के उनके पति रंजीत गौसगंज में सराफा की दुकान चलाते थे। 28 जुलाई 2016 की शाम दुकान बंद कर मोपेड से घर जा रहे थे। साथ में एक बैग में कुछ रुपये और जेवर भी थे। रास्ते में जेपी इंटर कॉलेज के पास एक बाइक पर आए तीन लोगों ने मोपेड में टक्कर मार दी थी। जेवर और रुपयों से भरे बैग को छीनने का विरोध करने पर रंजीत को तमंचे से गोली मार दी थी। पेट में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल रंजीत को सीएचसी संडीला से लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर किया गया था। 29 जुलाई को उनकी मौत हो गई थी।
विवेचना में उन्नाव जनपद के बीघापुर थाना क्षेत्र के अमीरखेड़ा निवासी राजेंद्र लोध, बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र के अंबेडकर गांव निवासी कन्हैया उर्फ करिया और अतर्धनी निवासी मानसिंह लोध का नाम सामने आया था। तीनों के खिलाफ लूट और हत्या की धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से नौ गवाहों को पेश किया गया।
अभियुक्तों के अधिवक्ता ने तीनों को दोष मुक्त किए जाने की मांग की। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने अधिक से अधिक सजा दिए जाने का तर्क दिया। दोनों पक्षों के तर्काें को सुनने और पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज कुसुमलता ने राजेंद्र लोध और कन्हैया उर्फ करिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साक्ष्य के अभाव में मानसिंह को बरी कर दिया गया है।