Hardoi News: लोकायुक्त की जांच में 12 लाख के फर्जी बिल-वाउचर मिलने के मामले में प्रधान के अधिकार सीज कर दिए गए हैं। साथ ही पांच पंचायत सचिवों के विरुद्ध भी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने गांवों में विकास और खरीदारी के नाम पर फर्जी बिल-वाउचर से करीब 12 लाख रुपये से अधिक का भुगतान निकाल लिया। लोकायुक्त की जांच में इस फर्जीवाड़े का पता चला। डीएम ने प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं, साथ ही पांच पंचायत सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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विकास खंड टोडरपुर की ग्राम पंचायत अंडौआ निवासी जयओम ने लोकायुक्त में परिवाद दर्ज कराया था। लोकायुक्त ने सीतापुर के डीडीओ, श्रम रोजगार उपायुक्त और जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के सहायक अभियंता से जांच कराई। तीन सदस्यीय समिति की ओर से दी गई रिपोर्ट में प्रशासनिक मद से की गई सामग्री की खरीद के बिल-वाउचर न मिलने की बात कही गई। इसी प्रकार हैंडपंप मरम्मत, गांव में गलियों और नालियों के निर्माण और भुगतान में गड़बड़ी मिली। जांच रिपोर्ट के बाद डीएम एमपी सिंह ने अंडौआ के प्रधान रामप्रकाशके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी।